Nepal Protest: काठमांडू में हिंसक आंदोलन का असर, नेपाल-बांग्लादेश का फुटबॉल मैच स्थगित
नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के अचानक लगाए गए बैन ने देशभर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। इस विरोध-प्रदर्शन ने अब खेल जगत को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दरअसल, नेपाल और बांग्लादेश के बीच 9 सितंबर को होने वाला दोस्ताना फुटबॉल मैच इन हालातों के चलते स्थगित कर दिया गया।
बांग्लादेश की फुटबॉल टीम नेपाल दौरे पर दो फ्रेंडली मैच खेलने आई थी। पहला मुकाबला 6 सितंबर को खेला गया, जो बिना किसी गोल के ड्रॉ रहा। इसके बाद फैंस को दूसरे मैच का बेसब्री से इंतजार था, लेकिन काठमांडू में भड़के आंदोलन ने सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब बांग्लादेशी खिलाड़ी सोमवार दोपहर प्रैक्टिस के लिए होटल से निकलने वाले थे, तब उन्हें स्थानीय अधिकारियों ने हालात की गंभीरता के बारे में बताया और मैदान जाने से रोक दिया। नतीजतन, टीम होटल में ही फंसी रह गई और मैच को टालने का फैसला करना पड़ा।
इस विरोध-प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह नेपाल सरकार का वह आदेश है, जिसमें फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तत्काल प्रभाव से बैन कर दिया गया। प्रधानमंत्री केपी ओली के इस कदम ने युवाओं में गुस्सा और बढ़ा दिया, जो पहले से ही बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर नाराज चल रहे थे। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और कई जगहों पर पुलिस से भिड़ंत हो गई। संसद भवन में घुसने की कोशिश करने वाले आंदोलनकारियों पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है।
खेल प्रेमियों के लिए यह खबर निराशाजनक है, क्योंकि नेपाल और बांग्लादेश के बीच होने वाले मैच का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। आयोजकों का कहना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हालात सामान्य होने तक मैच आयोजित नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह मुकाबला कब होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
काठमांडू और अन्य शहरों में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव से यह साफ हो गया है कि सोशल मीडिया बैन का फैसला देश की राजनीति और समाज के साथ-साथ खेल जगत को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द काबू में नहीं आए, तो नेपाल अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों और पर्यटन पर भी बड़ा नुकसान झेल सकता है।
Share this content:
