April 17, 2026

नेपाल में हिंसा के बाद ओली का नया ठिकाना, 9 दिन सेना की बैरक में बिताने के बाद निजी घर पहुंचे

नेपाल में हाल ही में भड़के हिंसक प्रदर्शनों के बाद देश की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला। विरोध प्रदर्शनों की आड़ में संसद पर हमला हुआ और हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को न सिर्फ अपने आधिकारिक आवास से निकलना पड़ा बल्कि प्रधानमंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफे के बाद उनकी सुरक्षा को देखते हुए सेना ने उन्हें शरण दी और वे नौ दिन तक सेना की बैरक में रहे। अब वे काठमांडू से बाहर एक निजी घर में शिफ्ट हो गए हैं।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना की यह बैरक काठमांडू के उत्तर में शिवपुरी वन क्षेत्र में स्थित थी, जहां ओली को सुरक्षित रखा गया था। हालांकि, अब उनके नए निवास का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है। सूत्रों का दावा है कि वे काठमांडू से करीब 15 किलोमीटर पूर्व, भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके के एक निजी घर में रह रहे हैं। सुरक्षा कारणों से उनके सटीक ठिकाने की जानकारी साझा नहीं की गई है।

 

ओली के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद देश की कमान सुशीला कार्की को सौंपी गई है। वे नेपाल की नई प्रधानमंत्री बनीं और मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच उन्होंने कार्यभार संभाला। दूसरी ओर, ओली के निजी आवास भक्तपुर के बालकोट को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया था। उस दौरान ओली प्रधानमंत्री आवास पर थे और स्थिति बिगड़ते ही सेना के हेलीकॉप्टर से उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। उनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड, शेर बहादुर देउबा, झालानाथ खनल और माधव कुमार नेपाल जैसे कई वरिष्ठ नेता भी कुछ दिनों तक सेना की सुरक्षा में रहे।

 

इधर, कांग्रेस अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी अराजू राणा देउबा अब भी सेना की सुरक्षा में हैं। प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल हुए दोनों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। यह घटना नेपाल की राजनीति के अस्थिर हालात और नेताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

इस बीच, ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल 19 सितंबर को संविधान दिवस के अवसर पर ललितपुर जिले के च्यासल में एक कार्यक्रम आयोजित कर रही है। यह पार्टी का केंद्रीय कार्यक्रम होगा, लेकिन इसमें ओली की उपस्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वे इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो यह उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

 

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