दिल्ली में नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों पर विवाद गहराया, बंद करने की मांग तेज
नई दिल्ली: नवरात्रि के दौरान दिल्ली में मीट की दुकानों को बंद करने की मांग जोर पकड़ रही है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों, व्यापारियों और धार्मिक संगठनों के बीच हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर कुछ संगठनों ने मीट की दुकानों को बंद करने की अपील की है, वहीं दूसरी ओर दुकानदार प्रशासनिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
सनातन सम्मान रक्षा समिति का प्रदर्शन, मीट दुकानदारों से अपील
गुरुवार को राजधानी के शकरपुर इलाके में सनातन सम्मान रक्षा समिति के नेतृत्व में एक मार्च निकाला गया, जिसमें मीट की दुकानों को नवरात्रि के दौरान बंद रखने की अपील की गई। इस मार्च का नेतृत्व स्थानीय भाजपा पार्षद रामकिशोर शर्मा ने किया, जो अपने समर्थकों के साथ पोस्टर-बैनर लेकर इलाके की मीट और बिरयानी की दुकानों तक पहुंचे। उन्होंने दुकानदारों से नवरात्रि के दौरान दुकानें बंद रखने का अनुरोध किया, ताकि हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
रामकिशोर शर्मा ने कहा, “नवरात्रि के पवित्र दिनों में मीट की दुकानों का खुला रहना सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था पर चोट करता है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में प्रशासन के आदेश से नवरात्र के दौरान मीट की दुकानें बंद कराई जाती हैं, वैसे ही अगले साल से दिल्ली में भी यही व्यवस्था लागू कराई जाएगी। दिल्ली सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है।”
व्यापारियों और दुकानदारों की प्रतिक्रिया
मीट विक्रेताओं और रेस्तरां संचालकों ने इस मुद्दे पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक आदेश आता है, तो वे उसका पालन करेंगे। कई दुकानदारों ने यह भी बताया कि वे नवरात्रि के दौरान स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखते हैं, क्योंकि इस अवधि में मीट की मांग में भी गिरावट आती है।
हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है। दिल्ली में मीट की दुकानों को बंद करने की मांग बीजेपी विधायकों की ओर से भी उठाई जा रही है, जिससे राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
क्या दिल्ली में भी लागू होगा यूपी जैसा नियम?
उत्तर प्रदेश में नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों को बंद रखने का प्रशासनिक आदेश लागू होता है, लेकिन दिल्ली में अभी ऐसा कोई नियम नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे इस दिशा में सरकार पर दबाव बनाएंगे, ताकि अगले साल से यह नियम दिल्ली में भी लागू हो सके।
नवरात्रि और मीट की दुकानें: धार्मिक आस्था बनाम व्यवसायिक स्वतंत्रता
इस विवाद ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है—क्या धार्मिक भावनाओं के आधार पर मीट की दुकानों को बंद कराना जायज है, या यह व्यवसायिक स्वतंत्रता का हनन माना जाएगा? यह बहस केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी समय-समय पर यह मुद्दा उठता रहा है।
फिलहाल, प्रशासनिक स्तर पर नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों को बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से यह मांग जोर पकड़ रही है, उसे देखते हुए आने वाले समय में इस पर कोई न कोई निर्णय लिया जा सकता है।
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