पहला नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले भारतीय एक्टर को मिले थे सिर्फ 5,000 रुपये, अब मिलते हैं लाखों
1 अगस्त 2025 को 71वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की घोषणा हुई, जिसमें शाहरुख खान और विक्रांत मैसी को संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला, जबकि बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड रानी मुखर्जी को मिला. यह शाहरुख खान के 33 साल के करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड किस अभिनेता को मिला था और उस समय कितनी इनामी राशि दी जाती थी?
भारत सरकार की ओर से दिए जाने वाले नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में विजेताओं को अब सर्टिफिकेट, मेडल और नकद पुरस्कार दिए जाते हैं. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के साथ 15 लाख रुपये, गोल्डन लोटस अवॉर्ड के साथ 3 लाख रुपये और सिल्वर लोटस अवॉर्ड के साथ 2 लाख रुपये की नकद राशि मिलती है. लेकिन जब यह परंपरा शुरू हुई थी, तब इनामी राशि बहुत सीमित हुआ करती थी.
पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीतने वाले अभिनेता बंगाली सिनेमा के दिग्गज उत्तम कुमार थे. उन्हें 1967 में फिल्म ‘एंथोनी फिरंगी’ और ‘चिड़ियाखाना’ में उनके दमदार अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था. खास बात यह है कि वे एकमात्र अभिनेता थे जिन्हें एक ही साल में दो अलग-अलग फिल्मों के लिए यह सम्मान मिला था. हिंदी सिनेमा की बात करें तो पहले नेशनल अवॉर्ड विजेता एक्टर अशोक कुमार थे.
उत्तम कुमार, जिनका असली नाम अरुण कुमार चैटर्जी था, का जन्म 3 सितंबर 1926 को हुआ था. उन्होंने 1948 में Drishtidan से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद 1952 में आई Basu Paribar उनकी पहली बड़ी हिट बनी. सुचित्रा सेन के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय हुई. उन्होंने अपने करियर में 211 फिल्मों में काम किया और उन्हें 5 नेशनल अवॉर्ड और 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिले.
साल 1967 में उत्तम कुमार को जो पुरस्कार मिला, उसमें उन्हें सिल्वर लोटस (रजत कमल) के साथ केवल 5,000 रुपये की नकद राशि दी गई थी. जबकि बेस्ट फीचर फिल्म के विजेता को उस समय 20,000 रुपये, गोल्ड मेडल और एक बैज मिलता था. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि कई बार सिर्फ सम्मान और ट्रॉफी ही दी जाती थी. यह देखना दिलचस्प है कि आज के दौर में जहां पुरस्कार राशि लाखों में पहुंच गई है, वहीं कभी यह सिर्फ कुछ हजारों तक सीमित थी.
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