April 30, 2026

मुंबई से लॉर्ड्स तक: रविंद्र गोपीनाथ संते की जिंदादिली ने दिल जीत लिया, इंग्लैंड में करेंगे टीम इंडिया की अगुवाई

मुंबई के डोंबिवली से इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स स्टेडियम तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन रविंद्र गोपीनाथ संते ने अपने हौसले से यह कर दिखाया है। 6 महीने की उम्र में डॉक्टर की लापरवाही से लकवे का शिकार हुए संते ने कभी हार नहीं मानी। अब वे इंडियन मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम के कप्तान बने हैं और इंग्लैंड दौरे पर 7 मैचों की टी20 सीरीज में टीम का नेतृत्व करेंगे।

यह टीम इंग्लैंड में 25 जून को लॉर्ड्स में तीसरा मुकाबला खेलेगी, और संते की कहानी हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो मुश्किल हालातों से जूझ रहा है।

संघर्षों भरा सफर, लेकिन न रुके कदम

डोंबिवली से विरार की 116 किलोमीटर की लोकल ट्रेन यात्रा रोज तय करना, फिर सीमित संसाधनों में अपनी फिटनेस और स्किल्स को तराशना – यह रविंद्र गोपीनाथ संते का रूटीन था। साईनाथ क्रिकेट क्लब में उन्होंने कोच रविंद्र पाटिल से प्रशिक्षण लिया। पाटिल ही वो इंसान हैं जिन्होंने संते की काबिलियत को पहचाना और उन्हें लगातार गाइड किया।

संते का क्रिकेटिंग सफर तब शुरू हुआ जब उन्होंने केवी पेंढारकर कॉलेज की ओर से क्रिकेट खेलना शुरू किया और एक मैच में अर्धशतक लगाकर लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद एक एग्जीबिशन मैच में हिस्सा लिया, जहां उनकी मुलाकात रवि पाटिल से हुई। यहीं से उनका रास्ता महाराष्ट्र डिसेबिलिटी टीम और फिर भारत की मिक्सड डिसेबिलिटी टीम तक पहुंचा।

युवराज सिंह से मिली प्रेरणा

रविंद्र संते बताते हैं कि उन्हें कैंसर से लड़कर वापसी करने वाले युवराज सिंह से काफी प्रेरणा मिली। वे कहते हैं, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि डिसेबिलिटी क्रिकेट जैसी कोई चीज होती है। लेकिन जब मुझे इसका पता चला, तब मैंने खुद को पूरी तरह झोंक दिया।”

ऐतिहासिक मैच और बड़ा मौका

टीम इंडिया की मिक्स्ड डिसेबिलिटी टीम अब इंग्लैंड में 7 टी20 मैचों की सीरीज खेलेगी। खास बात ये है कि 1 जुलाई को ब्रिस्टल में डबल हेडर मुकाबला होगा, जहां मिक्स्ड टीम इंडियन वुमेन टीम के खिलाफ भी मैच खेलेगी। सभी मुकाबले भारत में Sony LIV पर स्ट्रीम होंगे।

रविंद्र गोपीनाथ संते की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि अदम्य साहस की मिसाल है। उन्होंने यह साबित किया है कि शरीर की सीमाएं मन की उड़ान को नहीं रोक सकतीं। लॉर्ड्स में जब वे भारत का नेतृत्व करेंगे, तब उनके साथ सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि करोड़ों उम्मीदें और भावनाएं भी मैदान पर होंगी।

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