मुंबई: ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ में दिखे सामाजिक संदेश की कमी पर बोले डायरेक्टर अमर कौशिक – “हर फिल्म में मैसेज जरूरी नहीं”
फिल्ममेकर अमर कौशिक की नई हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘थामा’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। इस फिल्म में आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना की जोड़ी पहली बार साथ नजर आई है। ‘थामा’ को मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पहले ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ जैसी सफल फिल्में शामिल हैं। हालांकि दर्शकों ने सवाल उठाया कि पिछली फिल्मों की तरह ‘थामा’ में कोई स्पष्ट सामाजिक संदेश क्यों नहीं है। इस पर अब डायरेक्टर अमर कौशिक ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है।
अमर कौशिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा कहानी और उसके प्रवाह पर रहती है, न कि सितारों या किसी विशेष संदेश पर। उन्होंने कहा, “जब हमने इस यूनिवर्स की कल्पना की थी, तब हमने कभी सितारों के बारे में नहीं सोचा था। सितारे यूनिवर्स का निर्माण नहीं करते, वे उसका एक हिस्सा हैं। हमारा ध्यान हमेशा कहानी और उसके देसी रंग पर रहा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मैडॉक सिनेमैटिक यूनिवर्स का मकसद दर्शकों को मनोरंजन देना है, न कि हर बार किसी विचारधारा या संदेश को दोहराना।
‘थामा’ में सामाजिक संदेश की कमी पर अमर कौशिक ने कहा, “हमने कभी नहीं कहा कि हर फिल्म में कोई मैसेज होना चाहिए। अगर आप ध्यान दें, तो फिल्म में एक संकेत जरूर है। बेताल कहता है कि इंसान अब एक-दूसरे का खून पी रहा है और उसका खून अब शुद्ध नहीं रहा। यह संवाद खुद में एक रूपक है — इसे आप चाहें तो मैसेज के तौर पर लें या केवल मनोरंजन के रूप में।” उन्होंने कहा कि ‘थामा’ की कहानी का मूल मनोरंजन और व्यंग्य पर आधारित है, जिसमें दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने वाले पल तो हैं, लेकिन किसी सीधे सामाजिक संदेश का बोझ नहीं है।
निर्देशक ने यह भी बताया कि उनकी हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स की हर फिल्म अपने-अपने किरदारों के माध्यम से जुड़ी हुई है। “हमारा लक्ष्य हर फिल्म को पिछले से बड़ा और दिलचस्प बनाना है। हम किरदारों को जोड़ते हैं, लेकिन हर कहानी अपनी अलग आत्मा रखती है। ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ में संदेश था, क्योंकि उनकी कहानी वहीं से निकलती थी। ‘थामा’ की आत्मा अलग है,” उन्होंने कहा।
अमर कौशिक ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि उन्हें निर्देशन और निर्माण, दोनों भूमिकाओं में आनंद आता है, लेकिन बतौर निर्देशक वह खुद को ज्यादा सहज महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कहानियां सुनाना पसंद है। शुरुआत में लगा था कि निर्माता का काम केवल फंडिंग तक सीमित है, लेकिन अब समझ आया है कि एक निर्माता भी रचनात्मक रूप से फिल्म निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है।”
अमर कौशिक की ‘थामा’ वर्तमान में दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां फिल्म अपनी कहानी और अभिनय के लिए सराही जा रही है, वहीं कुछ दर्शकों का मानना है कि इसमें ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ जैसी सामाजिक गहराई नहीं है। इस पर डायरेक्टर का जवाब साफ है – “हर फिल्म का अपना स्वाद होता है, और हर कहानी को किसी संदेश की जरूरत नहीं होती।”
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