फुटबॉल के सितारे से जलेबी बेचने तक: पाकिस्तान के पूर्व फुटबॉलर मोहम्मद रियाज़ की संघर्षभरी कहानी
खर्च, लेकिन पूर्व खिलाड़ी सड़क पर मजबूर! कब मिलेगा मोहम्मद रियाज़ को इंसाफ?
पाकिस्तान में खेलों की दुर्दशा की एक औरखेलों के लिए करोड़ों दर्दनाक कहानी सामने आई है। देश के पूर्व फुटबॉलर मोहम्मद रियाज़, जिन्होंने 2018 एशियाई खेलों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था, आज फुटबॉल छोड़कर जलेबी बेचने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें रियाज़ सड़क किनारे जलेबी बनाते हुए दिख रहे हैं। यह वीडियो पाकिस्तान में खेलों को मिलने वाले समर्थन की सच्चाई को उजागर करता है।
प्रधानमंत्री ने किया था मदद का वादा, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं बदला
मोहम्मद रियाज़ को उम्मीद थी कि उनकी मेहनत और संघर्ष को पहचान मिलेगी। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनकी मदद का वादा किया था, लेकिन वह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। हर बीतते दिन के साथ हालात बदतर होते गए और रियाज़ को फुटबॉल छोड़कर अपने परिवार के लिए जलेबी बेचने का फैसला लेना पड़ा।
“प्रधानमंत्री ने मदद का वादा किया था, लेकिन इंतजार असहनीय हो गया। आमदनी के बिना परिवार का गुजारा मुश्किल था। इसलिए मैंने ईमानदारी से काम करना शुरू किया और फुटबॉल की प्रैक्टिस छोड़ दी,” रियाज़ ने अपने संघर्ष को बयान करते हुए कहा।
पाकिस्तान खेलों पर खर्च कर रहा करोड़ों, लेकिन खिलाड़ियों के पास रोजी-रोटी नहीं
यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब पाकिस्तान सरकार चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के लिए स्टेडियमों और क्रिकेट सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन दूसरी ओर इसी देश के खिलाड़ी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मोहम्मद रियाज़ जैसे खिलाड़ी, जिन्होंने अपने पूरे करियर में देश के लिए खेला, आज सरकार की बेरुखी और उदासीनता का शिकार हो रहे हैं।
29 वर्षीय रियाज़ हंगू के रहने वाले हैं और उन्होंने पाकिस्तान की के-इलेक्ट्रिक जैसी बड़ी कॉर्पोरेट टीम के लिए भी खेला है। लेकिन जब पाकिस्तान सरकार ने विभागीय खेलों पर प्रतिबंध लगाया, तो रियाज़ की फुटबॉल करियर खत्म होने के कगार पर पहुंच गया। उनका मानना है कि यह फैसला गलत था और इससे कई खिलाड़ियों का करियर बर्बाद हो गया।
“अगर युवा हमें संघर्ष करते हुए देखेंगे, तो उनमें फुटबॉल खेलने की इच्छा कैसे जागेगी?” रियाज़ ने खेलों के प्रति सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा।
यूरोप में खेलने की क्षमता थी, लेकिन सरकार की बेरुखी ने छीन लिया मौका
मोहम्मद रियाज़ की प्रतिभा को देखकर कई खेल विशेषज्ञों का मानना है कि वह यूरोप में भी सफल हो सकते थे। पाकिस्तान के खेल मंत्री के पूर्व सलाहकार तैमूर कयानी ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा, “रियाज़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी का जलेबी बेचते देखना बेहद दुखद है। वह यूरोप में खेलने की काबिलियत रखते थे, लेकिन सरकार और खेल संगठनों की लापरवाही ने उनकी जिंदगी को इस मुकाम पर पहुंचा दिया।”
कयानी ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वह उन अधिकारियों को जवाबदेह ठहराएं जिन्होंने खिलाड़ियों की मदद नहीं की और यह सुनिश्चित करें कि ऐसे हालात दोबारा न बनें।
पाकिस्तान में खेलों को समर्थन कब मिलेगा?
मोहम्मद रियाज़ की कहानी अकेली नहीं है। पाकिस्तान में ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो सरकार की उपेक्षा और खेल संगठनों की लापरवाही के कारण अपने करियर को अलविदा कह चुके हैं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि पाकिस्तान के खेलों की हकीकत बयां करती है।
अगर जल्द ही सरकार और समाज ने खेलों को प्राथमिकता नहीं दी, तो भविष्य में और भी कई मोहम्मद रियाज़ अपनी प्रतिभा को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।
क्या पाकिस्तान सरकार अब भी खिलाड़ियों के लिए जागेगी, या फिर खेलों का भविष्य इसी तरह अंधकार में डूबता रहेगा?
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