मोहम्मद शमी का आईसीसी से लार के इस्तेमाल की मंजूरी की मांग: क्या तेज गेंदबाजों के लिए यह एक नई उम्मीद होगी?
चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत की तेज गेंदबाजी का सबसे अहम स्तंभ बन चुके मोहम्मद शमी ने हाल ही में आईसीसी से एक बड़ी मांग की है। शमी का कहना है कि गेंद पर लार के इस्तेमाल पर लगी रोक को फिर से बहाल किया जाए। कोविड-19 के दौरान, आईसीसी ने खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गेंद पर लार लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे तेज गेंदबाजों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक—रिवर्स स्विंग—प्राप्त करना बेहद कठिन हो गया है, जो कि गेंदबाजों के खेल का अहम हिस्सा है।
आईसीसी की लार नीति और तेज गेंदबाजों के लिए चुनौतियां
कोविड के बाद, लार पर प्रतिबंध का प्रभाव केवल तेज गेंदबाजों पर ही नहीं पड़ा, बल्कि इससे क्रिकेट के खेल के रोमांच और तकनीकी पहलुओं पर भी असर हुआ। रिवर्स स्विंग, जो तेज गेंदबाजों के लिए एक खतरनाक हथियार होता था, अब दुर्लभ हो गया है। मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज इस स्थिति से जूझ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने प्रमुख हथियार को फिर से इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिल रही है। शमी ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि आईसीसी को लार के इस्तेमाल पर फिर से विचार करना चाहिए, क्योंकि यह बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच सही संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
दो नई गेंदों का नियम और इसकी मुश्किलें
शमी ने इस मुद्दे को और भी गंभीर रूप से उठाया, खासकर दो नई गेंदों के नियम के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। वनडे क्रिकेट में यह नियम लागू होने के बाद गेंदबाजों के लिए काम और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि नई गेंद से रिवर्स स्विंग करना और भी मुश्किल हो गया है। शमी ने कहा, “हम रिवर्स स्विंग करने का प्रयास करते हैं, लेकिन लार का इस्तेमाल नहीं कर सकते। अगर हम लार का इस्तेमाल करने की अनुमति पाते हैं, तो गेंदबाजों को ज्यादा मदद मिलेगी और खेल भी अधिक रोमांचक होगा।”
टीम इंडिया के लिए शमी की बढ़ी हुई जिम्मेदारी
शमी की यह मांग केवल तकनीकी समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी अपनी स्थिति से भी जुड़ी हुई है। चोट से उबरकर वापसी करने के बाद, शमी ने चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की तेज गेंदबाजी का नेतृत्व किया है। जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में, शमी पर जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है, क्योंकि टीम में दो विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों की कमी है। चोटिल होने के बाद बुमराह की जगह शमी को हर्षित राणा और हार्दिक पांड्या के साथ नई गेंद संभालने की जिम्मेदारी मिली है। राणा अभी नए हैं और पांड्या आमतौर पर ऑलराउंडर होते हैं, जो वनडे में 10 ओवर नहीं डालते। इस स्थिति में, शमी पर और भी दबाव बढ़ा है, और वह इस चुनौती को पूरी शिद्दत से स्वीकार कर रहे हैं।
शमी ने खुद कहा, “मैं लय वापस पाने की कोशिश कर रहा हूं और टीम के लिए अतिरिक्त योगदान देना चाहता हूं। जब आप मुख्य तेज गेंदबाज होते हैं, और साथ में एक ऑलराउंडर होते हैं, तो कार्यभार अधिक हो जाता है। आपको मोर्चे से अगुआई करनी होती है। मैं इस जिम्मेदारी को निभाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं और अपनी शत-प्रतिशत से अधिक देने की कोशिश कर रहा हूं।”
शमी का अद्भुत प्रदर्शन: आठ विकेट और एक प्रमुख योगदान
अब तक शमी ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में 8 विकेट झटके हैं और उनका प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए बेहद अहम रहा है। उनका शानदार प्रदर्शन इस बात का प्रतीक है कि वह टूर्नामेंट में एक स्थिर और प्रभावी गेंदबाज के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनका प्रदर्शन इससे भी खास है कि उन्होंने विश्व कप 2023 में टखने में गंभीर चोट पाई थी, जिसके कारण उन्हें लंबा ब्रेक लेना पड़ा था। लेकिन वापसी के बाद, शमी ने टीम के लिए भरपूर योगदान दिया है, और उनकी निरंतरता ने उन्हें टीम इंडिया का एक अहम हिस्सा बना दिया है।
क्यों जरूरी है लार की वापसी?
शमी की मांग केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी तेज गेंदबाजों के लिए एक सामूहिक मुद्दा बन चुका है। लार के बिना रिवर्स स्विंग का महत्व काफी घट गया है, और तेज गेंदबाजों को अधिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अगर आईसीसी इस पर पुनर्विचार करता है और लार के इस्तेमाल की अनुमति देता है, तो यह गेंदबाजों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है। इसके साथ ही, खेल का रोमांच भी बढ़ेगा, क्योंकि तेज गेंदबाजों का दबदबा बल्लेबाजों पर बढ़ेगा, जिससे मैच और भी दिलचस्प बनेंगे।
आखिरी विचार: क्या बदलाव होगा?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आईसीसी इस मुद्दे पर क्या फैसला लेता है और क्या वह गेंद पर लार के इस्तेमाल की अनुमति फिर से देता है या नहीं। मोहम्मद शमी की आवाज़ सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि हर उस गेंदबाज की आवाज़ है जो अपनी पूरी क्षमता के साथ मैच में प्रभाव डालने के लिए तत्पर है। अगर आईसीसी इस मुद्दे पर निर्णय बदलता है, तो यह क्रिकेट की दिशा में एक अहम बदलाव साबित हो सकता है, जो भारतीय टीम और अन्य देशों के तेज गेंदबाजों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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