मथुरा में पुलिस और गैंगस्टर असद के बीच मुठभेड़ – एक लाख के इनामी बदमाश का खौफनाक अंत!
मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक सनसनीखेज मुठभेड़ में पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर असद को ढेर कर दिया। यह वही असद था, जिसने पिछले दो दशकों से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में अपराध की दुनिया में अपना खौफ बना रखा था। तीन दर्जन से अधिक लूट, डकैती और हत्याओं के मामलों में वांछित असद पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी, और आखिरकार एक हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर में उसका खात्मा कर दिया गया।
सुबह का खतरनाक मुठभेड़, जब गोलियों की गूंज से दहला मथुरा
सूत्रों के मुताबिक, रविवार तड़के पुलिस को सूचना मिली थी कि असद अपने गिरोह के साथ किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने के लिए निकला है। डीआईजी शैलेश पांडे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने हाईवे थाना क्षेत्र में नाकाबंदी की। जैसे ही असद वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया। लेकिन बदमाश असद ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग की, और देखते ही देखते गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा। कुछ ही देर में असद पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया और सड़क पर गिर पड़ा। घायल अवस्था में उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कौन था असद? दो दशकों तक आतंक का दूसरा नाम
असद का आपराधिक इतिहास 2003 में जम्मू-कश्मीर के कठुआ से शुरू हुआ, जब उसने पहली बार डकैती और लूट को अंजाम दिया था। उसके बाद उसने 2012 में उत्तर प्रदेश के शामली में एक हत्या और डकैती को अंजाम देकर अपना कद अपराध की दुनिया में बढ़ाया। धीरे-धीरे वह छैमार गैंग का सरगना बन गया और कई राज्यों में अपराधियों का नेटवर्क खड़ा कर दिया।
असद पर तीन दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, लूट, डकैती और फिरौती जैसे अपराध शामिल थे। पुलिस ने कई बार उसे पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार वह बच निकलता था। उसके आतंक का आलम यह था कि लोग उसके नाम से ही कांपते थे।
पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी, गैंगस्टर राज का अंत
डीआईजी शैलेश पांडे ने इस मुठभेड़ को पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा, “असद लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। वह बेहद शातिर और खतरनाक अपराधी था, जिसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन हमारी टीम ने कड़ी मेहनत से उसकी लोकेशन ट्रेस की और आखिरकार उसे खत्म कर दिया गया।”
अब किस पर टिकी नजरें? छैमार गैंग की कमान कौन संभालेगा?
असद की मौत के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि छैमार गैंग की अगली कमान किसके हाथ में जाएगी। पुलिस को शक है कि उसके गुर्गे अभी भी सक्रिय हैं और वे बदले की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए मथुरा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस अब असद के सहयोगियों की तलाश में जुट गई है।
अपराधियों के खिलाफ पुलिस का कड़ा संदेश
इस एनकाउंटर के बाद पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पहले ही ‘माफिया राज’ खत्म करने का संकल्प ले चुकी है, और इस मुठभेड़ ने यह दिखा दिया कि पुलिस अब किसी भी अपराधी को बख्शने के मूड में नहीं है।
असद का खात्मा पुलिस की एक बड़ी जीत मानी जा रही है, लेकिन क्या इससे यूपी के अपराध जगत में वाकई खौफ पैदा होगा? क्या छैमार गैंग अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा, या कोई नया सरगना उभर कर सामने आएगा? यह देखने वाली बात होगी।
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