सपा से निष्कासित विधायक मनोज पांडेय बोले – “अगर पीडीए देखना है तो हमारे घर आओ, हमने अंतरात्मा की आवाज पर निर्णय लिया”
रायबरेली | 26 जून 2025 — समाजवादी पार्टी से निष्कासित होने के बाद पहली बार खुलकर सामने आए ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने पार्टी नेतृत्व और उसकी मौजूदा विचारधारा पर तीखा हमला बोला है। पांडेय ने कहा कि उन्होंने जो भी निर्णय लिया, वह अंतरात्मा की आवाज पर लिया और अगर कोई पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल देखना चाहता है, तो वह उनके घर आकर देख सकता है।
तीन दशकों तक सपा की अग्रिम पंक्ति में सक्रिय रहे पांडेय का यह बयान सपा से उनके निष्कासन के दो दिन बाद आया है। उन्हें राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने के आरोप में पार्टी से निकाला गया था। उन्होंने कहा, “अब पार्टी विचारधारा से भटक चुकी है। जब किसी दल में विचारधारा का पतन होता है, तो घुटन होना स्वाभाविक है। मैंने कभी समझौतावादी राजनीति नहीं की।”
पांडेय ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वामी प्रसाद मौर्य पर भी निशाना साधा और कहा कि एक व्यक्ति कुछ ही दिनों में पार्टी में शामिल होता है और श्रीराम, माता सीता, दुर्गा और गंगा पर विवादास्पद टिप्पणियां करने लगता है, लेकिन नेतृत्व उसे राष्ट्रीय महासचिव और विधान परिषद सदस्य बना देता है। “जब रामचरितमानस की प्रतियां जलवाई जा रही थीं, तब मेरी आत्मा कांप रही थी,” पांडेय ने कहा।
उन्होंने साफ किया कि वे ऊंचाहार विधानसभा से इस्तीफा नहीं देंगे और जनता की सेवा करते रहेंगे। “मैंने कभी पद की लालसा नहीं रखी, कई अवसर मिले लेकिन ठुकरा दिए। मेरा लक्ष्य सिर्फ ऊंचाहार का विकास और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना है।”
पांडेय ने जातिवाद की राजनीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि “समाजवाद वही है जिसमें सौ में सौ घरों का विकास हो, न कि सिर्फ पांच घर पूड़ी खाएं और 95 भूखे रहें।” उन्होंने कहा कि समाज को जातियों में बांटने की कोशिशें गलत हैं और इससे बचने की ज़रूरत है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी की राजनीति में एक बार फिर सपा की अंदरूनी खींचतान और वैचारिक असंतुलन को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि डॉ. पांडेय आगे किस राजनीतिक राह पर चलते हैं और क्या यह बयान उनके किसी नए सियासी कदम की शुरुआत है।
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