April 21, 2026

मणिपुर में पुलिस ने कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वार ग्रुप) के दो उग्रवादियों को किया गिरफ्तार, हथियारों का जखीरा बरामद

मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले से एक बड़ी खबर आई है, जहां पुलिस ने कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वार ग्रुप) के दो उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई रविवार को मणिपुर के एंड्रो इलाके में नगारियान हिल्स के एक पहाड़ी ठिकाने से की गई। गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान युमनाम अबुंग सिंह उर्फ चिंगकपा और थांगजाम जॉयकुमार सिंह के रूप में की गई है।

अपराधों की लम्बी सूची और जब्त सामग्री
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों उग्रवादी कई गंभीर अपराधों में शामिल थे। वे हथियार और गोलाबारूद का परिवहन करते थे और सरकारी अधिकारियों, निजी कंपनियों तथा आम जनता से जबरन वसूली करने में संलिप्त थे। गिरफ्तारी के दौरान इन उग्रवादियों के कब्जे से दो 9 एमएम पिस्तौल, दो मैगजीन, दो चीनी हथगोले, दस 9 एमएम कारतूस, दस 5.56 एमएम इंसास कारतूस और एक इंसास राइफल मैगजीन बरामद किया गया है।

मणिपुर में हथियारों का समर्पण जारी
मणिपुर के चार जिलों—इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, बिष्णुपुर और जिरीबाम में, जातीय संघर्ष से जूझ रहे लोगों ने पुलिस को 20 और हथियार सौंपे हैं। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, रविवार को इंफाल पूर्व जिले के पोरोमपट में एसडीपीओ कार्यालय में दो 9 एमएम पिस्तौल समेत तीन हथियारों को सरेंडर किया गया। वहीं बिष्णुपुर जिले में बीएसएफ के सामने चार हथियार, तीन ग्रेनेड और अन्य सामग्रियां सौंपे गए। जिरीबाम, वांगोई और सेकमाई पुलिस स्टेशनों में भी हथियारों का समर्पण हुआ।

राज्यपाल के आग्रह का असर: लोगों ने बढ़-चढ़कर किया हथियारों का समर्पण
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 20 फरवरी को युद्धरत समूहों से अपील की थी कि वे सुरक्षा बलों से लूटे गए हथियारों और अन्य अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिनों के भीतर स्वेच्छा से वापस करें। राज्यपाल की इस अपील का असर साफ तौर पर देखने को मिला, क्योंकि उस समय सीमा के भीतर घाटी के जिलों से 300 से अधिक हथियारों को जनता ने पुलिस को सौंप दिए थे। इसके बाद, राज्यपाल ने पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के लोगों की मांग पर हथियारों के लौटाने की समय सीमा को 6 मार्च तक बढ़ा दी।

पुलिस को मिले और अधिक हथियार
राज्य में स्थिति अब कुछ हद तक शांतिपूर्ण दिख रही है, लेकिन अब भी हथियारों का समर्पण जारी है। यह कदम राज्य की सुरक्षा स्थिति को सामान्य बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मणिपुर के विभिन्न हिस्सों में अब और अधिक हथियार पुलिस को सौंपे जा रहे हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि लोग हिंसा को समाप्त करने के लिए तैयार हैं।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू
मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था, जब राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, राज्य विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक था, को निलंबित कर दिया गया। राष्ट्रपति शासन के बाद, राज्य में पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कई बड़े कदम उठाए गए हैं, जिनमें हथियारों का समर्पण और उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल हैं।

क्या मणिपुर में शांति बहाल हो पाएगी?
मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष और उग्रवाद के बावजूद, अब राज्य में हथियारों का समर्पण और शांति की दिशा में उठाए गए कदमों के बाद, स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों का कहना है कि हालात को पूरी तरह से काबू में करने में समय लगेगा, लेकिन जनता और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कोशिशों से स्थिति को सामान्य बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

राज्य में जारी संघर्ष और तनाव के बीच यह एक सकारात्मक संकेत है कि मणिपुर के लोग अब हिंसा के बजाय शांति और सुरक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

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