May 3, 2026

प्रयागराज से काशी आए नागा साधुओं की सेहत पर आईएमएस बीएचयू की विशेष पहल, घाट पर हो रही है ओपीडी

प्रयागराज महाकुंभ के बाद काशी में आए नागा साधुओं की सेहत को लेकर आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्रा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। घाट वॉक के तहत वह अपने सहयोगियों के साथ काशी के विभिन्न घाटों पर एक विशेष ओपीडी चला रहे हैं, जहां नागा साधुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और उन्हें नि:शुल्क दवाइयां भी दी जा रही हैं।

नागा साधुओं की सेहत में आई परेशानी

प्रो. वीएन मिश्रा ने बताया कि महाकुंभ के दौरान गंगा किनारे महीनों तक रहकर साधु-संतों की सेहत में कुछ गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। खासतौर पर फेफड़ों में इंफेक्शन, एलर्जी और सर्दी-ज़ुकाम जैसी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं। नागा साधुओं का दिन-प्रतिदिन शारीरिक रूप से कठिन जीवन, भारी साधना और गंगा किनारे रहने के कारण उनका शरीर विभिन्न बिमारियों का शिकार हो रहा है।

घाट वॉक के जरिए हो रही ओपीडी

प्रो. मिश्रा और उनकी टीम ने इस स्थिति को समझते हुए घाट वॉक के रूप में एक खास ओपीडी शुरू की है। ओपीडी का संचालन काशी के प्रमुख घाटों जैसे शिवाला, दांडीघाट, हनुमान घाट और शंकराचार्य घाट पर हो रहा है। यह ओपीडी प्रतिदिन शाम 5 बजे से शुरू होती है, जहां वे साधुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं और आवश्यक जांच के बाद उन्हें इलाज और दवाइयां प्रदान करते हैं।

अब तक 125 साधुओं को मिल चुका इलाज

प्रो. वीएन मिश्रा ने बताया कि अब तक वे 125 से अधिक नागा साधुओं का इलाज कर चुके हैं। इन साधुओं को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं थीं, जिनमें से अधिकांश को फेफड़ों की इंफेक्शन और एलर्जी की समस्या थी। इसके अलावा, साधुओं को सर्दी और जुकाम की समस्याएं भी हो रही थीं, जो घाटों पर लगातार रहने के कारण और रेत के कणों के शरीर में जाने से उत्पन्न हो रही थीं।

चिंता की बात यह है कि रेत के कण शरीर में चले जाने से साधुओं की श्वसन प्रणाली प्रभावित हो रही है। प्रो. मिश्रा ने बताया कि कई साधु अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान हैं, लेकिन ओपीडी के माध्यम से उन्हें सही उपचार मिल रहा है। कुछ साधुओं को आवश्यकता पड़ने पर बीएचयू में भी उपचार दिया जाएगा।

नागा साधुओं के लिए विशेष हेल्थ कैंप

प्रो. मिश्रा ने आगे कहा कि ओपीडी के इस प्रयास को और बढ़ाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा साधु संत इसका लाभ उठा सकें। उनके अनुसार, घाट वॉक के तहत इस अभियान को लगातार जारी रखा जाएगा, ताकि सभी साधुओं को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सही और त्वरित इलाज मिल सके।

निरंतर निगरानी और उपचार की योजना

इस समय, जहां घाटों पर साधुओं का इलाज हो रहा है, वहीं उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी भी रखी जा रही है। प्रो. मिश्रा और उनकी टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि साधुओं को समय पर इलाज मिले और किसी भी प्रकार की गंभीर स्थिति उत्पन्न होने से पहले उनका इलाज किया जा सके।

यह पहल न केवल नागा साधुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह काशी में चिकित्सा क्षेत्र में भी एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

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