अंसल घोटाला: दिवालियापन के बाद भी निवेशकों के पैसे डूबने का खतरा, बड़ा आंदोलन तय
लखनऊ: अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के दिवालिया घोषित होने के बाद हजारों निवेशकों की पूंजी अधर में लटक गई है। शनिवार को नाराज आवंटी जब कंपनी के कार्यालय पहुंचे, तो वहां ताले लगे मिले। गुस्साए निवेशकों ने दो घंटे तक नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
6500 आवंटियों को अब भी रजिस्ट्री का इंतजार
प्रॉपर्टी डीलर गगन टंडन के नेतृत्व में जुटे आवंटियों ने आरोप लगाया कि अंसल ने 6500 से अधिक प्लॉट, मकान और फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं की, जबकि पैसा वसूल लिया। लोगों का कहना है कि वे पिछले दस वर्षों से भटक रहे हैं और अब न्याय के लिए कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
600 करोड़ की कमाई, फिर भी नहीं चुकाए 83 करोड़!
राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने अंसल के खिलाफ 83 करोड़ रुपये का भुगतान न करने पर कार्रवाई शुरू की थी। नवंबर में आदेश मिलने के बाद अंसल ने 500 से अधिक रजिस्ट्रियां कीं, जिससे 600 करोड़ रुपये की कमाई हुई, लेकिन इसके बावजूद कंपनी ने 83 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया।
‘पासपोर्ट जब्त करो, नहीं तो मालिक भाग जाएंगे’
आवंटियों ने सरकार से मांग की है कि अंसल से बकाया राशि जमा करवाई जाए और टाउनशिप के विकास की जिम्मेदारी अपने स्तर पर या एलडीए के जरिए पूरी की जाए। लोगों ने यह भी आशंका जताई कि अंसल के मालिक विदेश भाग सकते हैं, इसलिए उनका पासपोर्ट तुरंत जब्त किया जाए।
विधायक राजेश्वर सिंह से मिलेगी उम्मीद?
निवेशकों ने सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह से मुलाकात की, जिन्होंने मदद का आश्वासन दिया। वे सोमवार को अंसल के प्रभावित लोगों से मिलेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे।
3000 से ज्यादा केस दर्ज, लेकिन राहत नहीं
आवंटियों का कहना है कि अंसल के खिलाफ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में तीन हजार से अधिक मामले दर्ज हैं। अकेले लखनऊ में 900 रजिस्ट्रियां अटकी हुई हैं। कुछ लोगों को ऐसी जमीनें बेची गईं, जो अंसल के पास थीं ही नहीं।
अब क्या होगा? 11 मार्च तक निवेशकों को क्लेम फाइल करने का समय
एनसीएलटी के आदेश के बाद अब इंट्रिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) ने निवेशकों को 11 मार्च तक अपने क्लेम दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद 24 अगस्त तक एनसीएलटी को अंतिम प्रस्ताव सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर निवेशकों को पैसा लौटाने या जमीन पर कब्जा दिलाने का फैसला होगा।
आंदोलन की तैयारी, मुख्यमंत्री तक जाएगी शिकायत
सोमवार दोपहर 2 बजे सुशांत गोल्फ सिटी सेक्टर डी स्थित कार्यालय पर निवेशकों की बैठक होगी, जिसमें विधायक राजेश्वर सिंह भी शामिल हो सकते हैं। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने मामले को रखने की रणनीति बनेगी।
एलडीए और रेरा की भूमिका संदिग्ध!
आवंटियों ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और यूपी रेरा की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि एलडीए के अधिकारियों ने अंसल के साथ मिलकर ले-आउट में हेरफेर किया, लेकिन इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
जांचें हुईं, लेकिन नतीजा शून्य
2017 से अब तक कई बार जांच के आदेश हुए, लेकिन निवेशकों को राहत नहीं मिली।
2017: तत्कालीन आवास राज्यमंत्री सुरेश पासी ने निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
2018: अंसल के खिलाफ जांच के आदेश, लेकिन रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।
2019: 91 प्रोजेक्ट्स का फॉरेंसिक ऑडिट हुआ, 600 करोड़ की गड़बड़ी सामने आई, लेकिन अंसल पर शिकंजा नहीं कसा गया।
2020: बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के प्रॉपर्टी बेचने की शिकायत हुई, लेकिन कंपनी की मनमानी जारी रही।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएंगे, या हजारों निवेशक यूं ही अपने पैसे डूबने का इंतजार करते रहेंगे?
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