April 17, 2026

उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर का धमाकेदार विकास: नाबार्ड ने 2025 तक 52% वृद्धि का अनुमान, राज्य को मिलेंगे 4.45 लाख करोड़ रुपये के लोन!

उत्तर प्रदेश का एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम) क्षेत्र अब देश के सबसे तेजी से विकास करने वाले क्षेत्रों में शुमार हो गया है। नाबार्ड के हालिया अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में 52% की अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है। यदि पिछले वित्त वर्ष से तुलना की जाए, तो अगले साल एमएसएमई सेक्टर में करीब 4.45 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया जाएगा, जो कि पिछले साल की तुलना में 1.5 लाख करोड़ रुपये अधिक है। यह न केवल इंडस्ट्री के लिए मजबूती का संकेत है, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ बनाने में सहायक होगा।

प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर की बढ़ती ताकत

प्रदेश में पारंपरिक क्लस्टरों की मजबूत उपस्थिति और लगातार हो रहे बदलावों के चलते, एमएसएमई सेक्टर में अप्रत्याशित प्रगति हुई है। यूपी देश में सबसे अधिक संख्या में एमएसएमई इकाइयों का घर है। देश में लगभग 6.33 करोड़ छोटी इकाइयां हैं, जिनमें से 14% इकाइयां उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। इस क्षेत्र ने पिछले एक वर्ष में 18 लाख से अधिक नए रोजगार भी उत्पन्न किए हैं। नाबार्ड के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र में कुल 1.4 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

“एक जिला, एक उत्पाद” से नया मोड़

उत्तर प्रदेश सरकार की “एक जिला, एक उत्पाद” (ODOP) योजना, युवाओं के कौशल विकास और एमएसएमई नीति के प्रभाव से इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। छोटे उद्यमियों ने निर्यात पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब प्रदेश के निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत मीट और चर्म उत्पादों के साथ-साथ सॉफ्टवेयर, बीपीओ, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में सबसे तेज विकास हुआ है। नतीजतन, निर्यात ऋण में वृद्धि हो रही है, और 2025-26 में निर्यात के लिए 5,627 करोड़ रुपये के लोन का अनुमान है, जो अब तक की सबसे बड़ी राशि होगी।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान का प्रभाव

नाबार्ड के मुताबिक, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान प्रदेश में स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेगा। इस अभियान का असर आने वाले वर्षों में स्पष्ट दिखाई देगा, और इससे तकनीकी और निर्माण इकाइयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने भी इस क्षेत्र को प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बताया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद एमएसएमई सेक्टर की मॉनिटरिंग करते हैं और बैंकों द्वारा लोन की स्वीकृति की संख्या को बढ़ाने के लिए लगातार निर्देश दे रहे हैं।

एमएसएमई क्षेत्र में और भी संभावनाएं

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार का कहना है कि कृषि और एमएसएमई क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इन दोनों क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए, ताकि राज्य सरकार का 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल किया जा सके। यूपी में कुल 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनमें से 89.64 लाख सूक्ष्म इकाइयां हैं। प्रदेश में छोटी और बड़ी इकाइयों की संख्या भी अच्छी खासी है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही हैं।

संभावनाओं का अंतहीन रास्ता

राज्य सरकार की योजनाओं और नाबार्ड की मदद से उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर विकास की नई ऊँचाइयों को छूने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, इस क्षेत्र में नई दिशा, वृद्धि और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। अगले कुछ वर्षों में एमएसएमई सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बनेगा, और इस सेक्टर से होने वाली प्रगति प्रदेश की समृद्धि की गाथा लिखेगी।

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