लखनऊ में 12वीं के छात्र ने की आत्महत्या, ऑनलाइन गेमिंग की लत बनी मौत की वजह
के गोमतीनगर विस्तार इलाके से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 18 वर्षीय इंटर के छात्र सिद्धार्थ ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग की लत से परेशान था और पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। पुलिस को उसके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने साफ लिखा कि गेमिंग की वजह से न तो वह पढ़ाई कर पा रहा है और न ही परिवार को खुश रख पा रहा है, इसलिए उसने यह कदम उठाया। नोट में उसने माता-पिता से माफी मांगते हुए अपनी परेशानी जाहिर की।
घटना छोटा भरवारा क्षेत्र की है, जहां रवीन्द्र प्रताप सिंह का परिवार रहता है। सिद्धार्थ उनके तीन बच्चों में सबसे बड़ा था और इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा था। बुधवार की रात उसने परिवार के साथ सामान्य तरीके से भोजन किया और उसके बाद अपने कमरे में सोने चला गया। गुरुवार सुबह जब वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकला तो पिता ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। आखिरकार दरवाजा खोला गया तो सिद्धार्थ फांसी पर लटका मिला। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने घटनास्थल से अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट बरामद किया है। नोट में उसने लिखा कि ऑनलाइन गेमिंग की वजह से उसका जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। परिवार उसकी आदतों से परेशान है और वह खुद भी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ महसूस कर रहा है। यही वजह है कि उसने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साफ तौर पर मानसिक तनाव और ऑनलाइन गेमिंग की लत से जुड़ा है।
इस हादसे ने न सिर्फ परिवार को बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। घटना के समय घर में पिता और दो छोटी बहनें मौजूद थीं, जबकि मां कुछ दिनों से आजमगढ़ गई हुई थीं। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और घर में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर सुधीर अवस्थी ने बताया कि सुसाइड नोट के आधार पर साफ है कि किशोर गंभीर मानसिक दबाव में था, जो गेमिंग की लत से उपजा।
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ती है। आज के दौर में ऑनलाइन गेमिंग बच्चों और युवाओं के बीच तेजी से बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस लत को समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है और परिवारों को बर्बादी की ओर धकेल सकती है। सिद्धार्थ की मौत इस बात का संकेत है कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की मानसिक स्थिति और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे मामलों में बातचीत और काउंसलिंग बेहद अहम साबित हो सकती है।
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