लखनऊ: मंदिर परिसर में 65 वर्षीय दलित बुजुर्ग को पेशाब चाटने पर मजबूर किया, राजनीति गरमाई
काकोरी के दबंग दुकानदार ने की अमानवीय हरकत, पीड़ित रामपाल की न्याय की गुहार ने उठाया सवाल
लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र में शीतला माता मंदिर परिसर में एक 65 वर्षीय दलित बुजुर्ग रामपाल के साथ हुई अमानवीय घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। मोहनलालगंज क्षेत्र के निवासी रामपाल, जो सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं, सोमवार रात करीब 8 बजे तबीयत खराब होने पर मंदिर के सामने बैठ गए। इसी दौरान उनकी पेशाब अनियंत्रित हो गई। पास की ज्वैलरी दुकान चलाने वाले स्वामीकांत गुप्ता उर्फ पम्मू ने इसे देखकर गुस्से में आकर बुजुर्ग को गाली-गलौज की और मंदिर अपवित्र होने का हवाला देकर उन्हें अपनी ही पेशाब चाटने और पूरा मंदिर धोने पर मजबूर कर दिया। इस घटना ने न केवल समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी भूचाल ला दिया है।
पीड़ित रामपाल ने अपनी व्यथा बयां करते हुए बताया कि वह सांस के मरीज हैं और रात में अचानक तबीयत बिगड़ गई। मंदिर की सीढ़ियों पर बैठते ही पेशाब छूट गई, जिसे देख आरोपी पम्मू ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया। डर के मारे उन्होंने अपमान सहा और आरोपी के कहने पर पेशाब चाटी तथा मंदिर परिसर को पानी से साफ किया। इसके बाद आरोपी ने उन्हें लातें मारकर भगा दिया। रामपाल ने कहा, “मुझे न्याय चाहिए। जैसे मुझसे पेशाब चटवाई गई, वैसे ही आरोपी से भी वही करवाया जाए।” उनके पोते मुकेश ने बताया कि दादाजी की हालत गंभीर रहती है। घर लौटने पर घटना की जानकारी मिली तो परिवार ने तुरंत काकोरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस घटना ने बुजुर्ग के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया और आरोपी स्वामीकांत उर्फ पम्मू को गिरफ्तार कर लिया। एसीपी काकोरी शकील अहमद ने बताया कि पूछताछ जारी है और जांच में यह देखा जा रहा है कि घटना में कोई अन्य व्यक्ति शामिल तो नहीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपी चार भाइयों में से एक है और काकोरी क्षेत्र में वे दबंग माने जाते हैं। उन्हें ‘बंबे वाले’ के नाम से जाना जाता है। उनके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश है। जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा का आश्वासन दिया है और निष्पक्ष जांच का वचन दिया है।
इस घटना ने राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी का दौर तेज कर दिया। आजाद समाज पार्टी के सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इसे दलित विरोधी मानसिकता का नंगा प्रदर्शन बताते हुए संविधान पर प्रहार करार दिया। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि बीजेपी राज में दलित होना अपराध बन गया है और इंसानों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव हो रहा है। समाजवादी पार्टी के सांसद आरके चौधरी ने इसे संविधान पर हमला बताया और मनुस्मृति की मानसिकता का परिणाम कहा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। वहीं, भाजपा के पूर्व सांसद कौशल किशोर ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि रामपाल उनके पुराने साथी हैं। उन्होंने विधायक अमरेश रावत से बात की और थाने से जानकारी ली कि गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया है और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पूर्व सांसद कौशल किशोर ने पीड़ित से मुलाकात कर आश्वस्त किया कि आरोपी गिरफ्तार है और उचित कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में सख्त है और दोबारा ऐसी घटना न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। रामपाल और उनके परिवार ने केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूर्ण न्याय की मांग की है। यह घटना समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और अमानवीयता को उजागर करती है, जो न केवल कानूनी बल्कि नैतिक जांच की मांग करती है। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह घटना उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा रही है।
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