April 17, 2026

बिजली संकट की आशंका: 9 जुलाई को 27 लाख बिजली कर्मचारी करेंगे हड़ताल, इन्वर्टर और पावर बैकअप रखें तैयार

देशभर में बिजली आपूर्ति को लेकर 9 जुलाई 2025 को गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उत्तर प्रदेश की दो पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के निजीकरण के विरोध में 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर देशव्यापी हड़ताल पर जाने वाले हैं। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने इस हड़ताल का ऐलान किया है और साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अगर बिजली आपूर्ति बाधित होती है, तो उसके लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे।

क्यों हो रही है यह हड़ताल?

AIPEF के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का निजीकरण करने का फैसला किया है, जो राज्य के 75 में से 42 जिलों को बिजली आपूर्ति करती हैं। इस फैसले के खिलाफ अब राष्ट्रीय स्तर पर विरोध खड़ा हो चुका है। दुबे ने आरोप लगाया कि यह निर्णय निजी कंपनियों को औने-पौने दामों पर करोड़ों की सार्वजनिक संपत्तियां सौंपने की साजिश है, जिससे किसान और गरीब उपभोक्ताओं को दी जा रही सब्सिडी और राहत प्रभावित होगी।

किन शहरों में होगा असर?

इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर दिल्ली से लेकर चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, रांची, भुवनेश्वर, पटना, श्रीनगर, देहरादून, गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों तक महसूस हो सकता है। बिजली कर्मचारियों की यह हड़ताल बिजली वितरण, मरम्मत और सप्लाई मैनेजमेंट को सीधे प्रभावित कर सकती है।

लोगों को दी गई चेतावनी

हड़ताल की चेतावनी को देखते हुए AIPEF ने आम जनता से अपील की है कि वे अपना इन्वर्टर समय रहते चार्ज कर लें, पावर बैकअप की वैकल्पिक व्यवस्था करें और जरूरी उपकरणों की बैटरी समय पर फुल चार्ज रखें। खासतौर पर हॉस्पिटल, दफ्तर, स्कूल, और आईटी संस्थानों के लिए यह हड़ताल गंभीर असर डाल सकती है।

क्या कहती है सरकार?

फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस हड़ताल को टालने या समाधान निकालने को लेकर कोई स्पष्ट कदम सामने नहीं आया है। हालांकि अगर स्थिति बिगड़ती है तो सरकार के सामने जल्द से जल्द बातचीत कर समाधान निकालने की चुनौती होगी।

निष्कर्ष

9 जुलाई को देश एक बड़ी बिजली आपूर्ति बाधा का सामना कर सकता है। जनता को सतर्क रहने और पूर्व तैयारी करने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि 27 लाख कर्मचारियों का एक साथ काम ठप करना देशभर में बिजली संकट को जन्म दे सकता है। यदि कोई समाधान नहीं निकला, तो आम लोगों को गर्मी, कामकाज और रोजमर्रा की ज़िंदगी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

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