अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आने के बाद कश्मीर के कई हिस्सों में रविवार को विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अधिकारियों के अनुसार, खासतौर पर शिया आबादी वाले इलाकों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने इस हमले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त की तथा हमले की कड़ी निंदा की।
राजधानी श्रीनगर सहित कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई की तस्वीरें और ईरान के समर्थन में बैनर लेकर मार्च निकाला। इस दौरान काले झंडे लहराए गए और पारंपरिक शोक गीत (नौहा) भी गाए गए। प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि उनके प्रिय नेता की “क्रूरता से हत्या” की गई है, जिससे समुदाय में गहरा दुख और आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें ईरान से मिली जानकारी के अनुसार खामेनेई अब उनके बीच नहीं रहे, और इस घटना को लेकर वे गहरी पीड़ा महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय शिया मुस्लिम समुदाय के लिए खामेनेई केवल एक विदेशी राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि उन्हें मरजा-ए-तकलिद यानी धार्मिक मार्गदर्शक के रूप में भी देखा जाता था। इसी कारण उनकी मौत की खबर ने समुदाय के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की। धार्मिक दृष्टि से भी इस घटना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शिया परंपरा में मृत्यु के 40वें दिन (अरबाईन) का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है और इसी संदर्भ में शोक सभाओं और कार्यक्रमों की तैयारी की चर्चा भी सामने आई है।
उधर ईरान में खामेनेई की मृत्यु के बाद 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। देश भर में झंडे आधे झुका दिए गए हैं और सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना को इस्लामिक गणराज्य के लंबे राजनीतिक दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है, जिसने क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाला था। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया है। पार्टी नेताओं ने इस हमले को अमानवीय बताते हुए अपने निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए। वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की अस्थिरता को रोकने के लिए प्रशासन सतर्क है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार विदेश मंत्रालय के संपर्क में है ताकि ईरान में मौजूद जम्मू-कश्मीर के लोगों, विशेषकर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
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