April 17, 2026

केरल सचिवालय में चाय पर 6 लाख रुपये खर्च का मामला, सरकारी फिजूलखर्ची पर उठे गंभीर सवाल

केरल से सरकारी खर्च को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। राज्य सचिवालय में तैनात मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के सचिवों द्वारा सिर्फ तीन महीनों में चाय पर 6 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने का खुलासा हुआ है। इस भारी-भरकम राशि को लोक प्रशासन विभाग ने औपचारिक रूप से स्वीकृति भी दे दी है, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया है।

जानकारी के मुताबिक, लोक प्रशासन विभाग ने 2 फरवरी को एक आदेश जारी कर सचिवालय में चाय-पानी पर हुए खर्च को मंजूरी दी। आदेश में बताया गया कि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर—इन तीन महीनों में सचिवालय के अधिकारियों के लिए चाय पर कुल 6,05,434 रुपये खर्च किए गए। अकेले अक्टूबर महीने में 2,06,385 रुपये, नवंबर में 1,97,286 रुपये और दिसंबर में 2,01,763 रुपये केवल चाय पर खर्च हुए। यह खर्च सचिवालय परिसर में स्थित इंडियन कॉफी हाउस के माध्यम से किया गया, जिसे यह राशि आवंटित की गई है।

इस खुलासे के बाद आम लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। जनता का कहना है कि जब राज्य आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब इस तरह का फिजूलखर्च पूरी तरह से अनुचित है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन सी चाय थी, जिस पर महज तीन महीनों में लाखों रुपये खर्च हो गए। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह खर्च आधिकारिक बैठकों और सचिवालय में होने वाली गतिविधियों के दौरान चाय-पानी की व्यवस्था के नाम पर किया गया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम सामान्य प्रशासनिक जरूरतों के लिहाज से असामान्य है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस खर्च की विस्तृत जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि धन का उपयोग किस तरह और कितनी पारदर्शिता के साथ किया गया।

इस पूरे मामले ने केरल सरकार के वित्तीय अनुशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां सरकार आम जनता से खर्च में कटौती और मितव्ययता की अपील करती रही है, वहीं दूसरी ओर सचिवालय स्तर पर इस तरह का खर्च विरोधाभास पैदा करता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई विस्तृत सफाई नहीं दी गई है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस चाय खर्च को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस और तेज हो सकती है।

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