April 18, 2026

केरल में बढ़ रहा अमीबा संक्रमण का खतरा

केरल में ब्रेन-ईटिंग अमीबा (Naegleria fowleri) से जुड़े मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अब तक इस संक्रमण से राज्य में 19 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में इस बीमारी के 500 से भी कम मामले पाए गए हैं, लेकिन अकेले केरल में 120 से ज्यादा केस सामने आना बेहद चौंकाने वाला है। यह संक्रमण बेहद घातक है और दिमाग तक पहुंचने पर लगभग निश्चित रूप से मौत का कारण बनता है, क्योंकि इसका कोई ठोस इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है।

कैसे फैलता है ब्रेन-ईटिंग अमीबा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अमीबा गंदे और गर्म मीठे पानी में पनपता है। तैराकी, नहाने या खुले जलाशयों में स्नान के दौरान यह नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और सीधा दिमाग तक पहुंचकर संक्रमण पैदा करता है। इसे प्राइमरी अमीबिक मेनिंजोएन्सेफलाइटिस (PAM) कहा जाता है। बच्चों और युवाओं में यह संक्रमण ज्यादा देखा जाता है क्योंकि वे तालाबों, झीलों या स्विमिंग पूल में अधिक समय बिताते हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग, जो रोज़मर्रा के कामों के लिए खुले पानी का इस्तेमाल करते हैं, वे भी सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।

विशेषज्ञों की राय और लक्षण
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि यह बीमारी शुरुआती दौर में सामान्य वायरल संक्रमण जैसी लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे इसके लक्षण गंभीर हो जाते हैं। इसमें तेज सिरदर्द, बुखार, उल्टी, गर्दन में अकड़न, थकान और भ्रम जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मामलों में मरीज को दौरे और कोमा की स्थिति का भी सामना करना पड़ता है। इसकी मृत्यु दर 95% से भी ज्यादा बताई जाती है, इसलिए इसे चिकित्सा जगत में सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है।

केरल में मामले क्यों ज्यादा?
दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, केरल की गर्म और उमस भरी जलवायु, लगातार होने वाली बारिश और उसके बाद बन जाने वाले तालाब इस अमीबा के लिए आदर्श वातावरण तैयार करते हैं। इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में तालाबों, झीलों और असुरक्षित स्विमिंग पूल का इस्तेमाल संक्रमण के फैलाव को और बढ़ा रहा है। यही वजह है कि अकेले केरल में इतने अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
क्योंकि इस बीमारी का कोई निश्चित इलाज मौजूद नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पीने और नहाने के लिए हमेशा स्वच्छ या उबला हुआ पानी ही इस्तेमाल करना चाहिए। तालाब, झील या खुले जलाशयों में नहाने से बचें, और अगर जाएं तो नाक में पानी न जाने दें। स्विमिंग पूल की नियमित सफाई और क्लोरीनेशन भी बेहद जरूरी है। वहीं, सिरदर्द, बुखार, उल्टी या गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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