April 27, 2026

केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, पहले दिन सीएम धामी ने किए दर्शन

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री केदारनाथ धाम के कपाट शुक्रवार, 2 मई से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धाम पहुंच गए थे और उन्होंने भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात कर बातचीत भी की। हर वर्ष सर्दियों में बर्फबारी के कारण केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और गर्मियों की शुरुआत में यह फिर से खोले जाते हैं। इस बार छह महीने बाद कपाट खुले तो मंदिर को देश-विदेश से लाए गए 108 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया।

इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई। मंदिर को सजाने के लिए 150 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने दिन-रात मेहनत की। इन सभी को गर्व है कि उन्हें भगवान शिव की सेवा का अवसर मिला। रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर की सजावट के लिए गुलाब और गेंदा समेत 54 प्रकार के फूलों का उपयोग किया गया। सजावट टीम का नेतृत्व कर रहे वडोदरा निवासी सृजल व्यास ने बताया कि फूल दिल्ली, कश्मीर, पुणे, कोलकाता, पटना के अलावा नेपाल, थाईलैंड और श्रीलंका से मंगवाए गए थे। कोलकाता के एक विशेष गांव से लाए गए गेंदे के फूल विशेष रूप से टिकाऊ होते हैं और 10-15 दिनों तक ताजगी बनाए रखते हैं।

केदारनाथ मंदिर में गढ़वाल राइफल्स बैंड ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी। फूलों की ढुलाई में घोड़ों की अनुपस्थिति के कारण स्वयंसेवकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, फिर भी वे भगवान की सेवा करने के उत्साह से भरपूर थे। कई स्वयंसेवक खराब मौसम और ट्रेनों के रद्द होने के बावजूद हवाई जहाज से केदारनाथ पहुंचे। सृजल व्यास की टीम के सदस्य तपन देसाई ने इसे जीवनभर का अनुभव बताते हुए कहा कि यह भगवान शिव का दुर्लभ आशीर्वाद है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और 10 वर्षीय बेटा भी उनके साथ मंदिर की सजावट में शामिल हुए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी खराब स्वास्थ्य में होने के बावजूद इस सेवा के लिए पहुंची। व्यास ने मंदिर की सजावट को विवाह जैसे आयोजन की तरह बताया, जिसमें हर कोना सुंदरता से सजा हो। मंदिर के सौंदर्यीकरण में पश्चिम बंगाल के 35 कलाकारों ने भी सहयोग किया। सर्दियों में उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में रखी जाने वाली भगवान शिव की मूर्ति, फूलों से सजी पालकी में गौरीकुंड से रवाना होकर केदारनाथ धाम पहुंची। मुख्य पुजारी भीमाशंकर लिंग के अनुसार, कपाट खोलने की तैयारियां शुक्रवार सुबह छह बजे शुरू हुईं और ठीक सात बजे मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री केदारनाथ धाम के कपाट शुक्रवार, 2 मई से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धाम पहुंच गए थे और उन्होंने भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात कर बातचीत भी की। हर वर्ष सर्दियों में बर्फबारी के कारण केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और गर्मियों की शुरुआत में यह फिर से खोले जाते हैं। इस बार छह महीने बाद कपाट खुले तो मंदिर को देश-विदेश से लाए गए 108 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया।

इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई। मंदिर को सजाने के लिए 150 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने दिन-रात मेहनत की। इन सभी को गर्व है कि उन्हें भगवान शिव की सेवा का अवसर मिला। रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर की सजावट के लिए गुलाब और गेंदा समेत 54 प्रकार के फूलों का उपयोग किया गया। सजावट टीम का नेतृत्व कर रहे वडोदरा निवासी सृजल व्यास ने बताया कि फूल दिल्ली, कश्मीर, पुणे, कोलकाता, पटना के अलावा नेपाल, थाईलैंड और श्रीलंका से मंगवाए गए थे। कोलकाता के एक विशेष गांव से लाए गए गेंदे के फूल विशेष रूप से टिकाऊ होते हैं और 10-15 दिनों तक ताजगी बनाए रखते हैं।

केदारनाथ मंदिर में गढ़वाल राइफल्स बैंड ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी। फूलों की ढुलाई में घोड़ों की अनुपस्थिति के कारण स्वयंसेवकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, फिर भी वे भगवान की सेवा करने के उत्साह से भरपूर थे। कई स्वयंसेवक खराब मौसम और ट्रेनों के रद्द होने के बावजूद हवाई जहाज से केदारनाथ पहुंचे। सृजल व्यास की टीम के सदस्य तपन देसाई ने इसे जीवनभर का अनुभव बताते हुए कहा कि यह भगवान शिव का दुर्लभ आशीर्वाद है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और 10 वर्षीय बेटा भी उनके साथ मंदिर की सजावट में शामिल हुए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी खराब स्वास्थ्य में होने के बावजूद इस सेवा के लिए पहुंची। व्यास ने मंदिर की सजावट को विवाह जैसे आयोजन की तरह बताया, जिसमें हर कोना सुंदरता से सजा हो। मंदिर के सौंदर्यीकरण में पश्चिम बंगाल के 35 कलाकारों ने भी सहयोग किया। सर्दियों में उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में रखी जाने वाली भगवान शिव की मूर्ति, फूलों से सजी पालकी में गौरीकुंड से रवाना होकर केदारनाथ धाम पहुंची। मुख्य पुजारी भीमाशंकर लिंग के अनुसार, कपाट खोलने की तैयारियां शुक्रवार सुबह छह बजे शुरू हुईं और ठीक सात बजे मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

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