हमास नेताओं पर इजराइली हमला नाकाम, गाजा शांति प्रयासों को बड़ा झटका
कतर की राजधानी दोहा मंगलवार को अचानक हुए इजराइली हमलों से दहल उठी। खबरों के अनुसार, कुछ ही मिनटों के अंतराल में करीब आठ धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इजराइल ने इस हमले का निशाना हमास का राजनीतिक नेतृत्व बनाया था, जो गाजा में युद्धविराम को लेकर चर्चा में जुटा था। कतर के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि हमले दोहा स्थित हमास नेताओं के आवासीय भवनों पर किए गए। हालांकि, इन हमलों में हमास का शीर्ष नेतृत्व बच निकला और इजराइल की यह कोशिश नाकाम रही।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले का सबसे बड़ा लक्ष्य हमास के वरिष्ठ वार्ताकार खलील अल-हय्या थे, जो शांति वार्ता में अहम भूमिका निभा रहे थे। अल जजीरा के अनुसार, अल-हय्या और अन्य वरिष्ठ नेता सुरक्षित हैं, लेकिन इस कार्रवाई में पांच निचले स्तर के सदस्य मारे गए। हमास अधिकारी अल-हिंदी ने बताया कि हमले में अल-हय्या के बेटे हुमाम और उनके एक करीबी सहयोगी की भी मौत हो गई। साथ ही, कतर के आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि धमाकों में देश की सुरक्षा बल का एक सदस्य मारा गया और कई लोग घायल हुए हैं।
इस घटना के तुरंत बाद गाजा शांति वार्ता पर संकट गहरा गया है। खलील अल-हय्या और खालिद अल मशाल दोनों शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में सक्रिय थे। लेकिन इजराइल की इस कार्रवाई ने बातचीत की प्रक्रिया को कमजोर कर दिया है और क्षेत्र में तनाव और बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। कतर ने इस हमले को ‘कायराना कार्रवाई’ बताया और कहा कि यह शांति के प्रयासों को कमजोर करने की सोची-समझी साजिश है।
इस हमले की गूंज अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची। सऊदी अरब ने इजराइल की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और कतर की संप्रभुता का उल्लंघन है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इजराइल को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी हमले की निंदा की और कहा कि “सभी पक्षों को स्थायी युद्धविराम की दिशा में प्रयास करना चाहिए, न कि उसे विफल करने की।”
विश्लेषकों का मानना है कि इजराइल का यह हमला न केवल गाजा बल्कि पूरे मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल सकता है। पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में इस तरह की कार्रवाई ने अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय दबाव और अरब देशों की प्रतिक्रिया के बाद यह देखना होगा कि क्या शांति वार्ता फिर से पटरी पर लौट पाएगी या हालात और बिगड़ेंगे।
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