कनाडा सरकार ने हाल के दिनों में बढ़ रही गैंगस्टर गतिविधियों और उगाही के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग की घटना के बाद कनाडा बॉर्डर सिक्योरिटी एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन विदेशी नागरिकों को देश से डिपोर्ट कर दिया है। इन पर एक्सटॉर्शन (उगाही) गैंग चलाने और संगठित अपराध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
अधिकारियों के मुताबिक, ये कार्रवाई ब्रिटिश कोलंबिया एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स की जांच के तहत की गई है। एजेंसी ने बताया कि 78 अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान भी की गई है, जिनके खिलाफ इमिग्रेशन जांच शुरू कर दी गई है। पिछले कुछ महीनों में कनाडा के कई शहरों में भारतीय मूल के बिजनेसमैन और प्रवासियों को निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं में फायरिंग और धमकी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, कनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को पहले ही विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी आपराधिक गतिविधियों में तेजी आई है। ओंटारियो के ब्रैम्पटन और ब्रिटिश कोलंबिया जैसे इलाकों में बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा के गैंग लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में भारतीय मूल के कारोबारी दर्शन सिंह साहसी की हत्या के बाद इन गैंगों को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
कनाडा पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में सिर्फ सरे इलाके में एक्सटॉर्शन के 65 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 35 में फायरिंग हुई। अपराधी सोशल मीडिया के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में पैसे की मांग करते हैं और मना करने पर हिंसक हमला करते हैं। इस तरह की बढ़ती घटनाओं से भारतीय प्रवासी समुदाय में भय का माहौल है।
कनाडा सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई संगठित अपराध पर लगाम लगाने और विदेशी अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, डिपोर्ट किए गए तीनों आरोपियों की पहचान अभी उजागर नहीं की गई है। लेकिन अधिकारियों ने साफ किया कि देश में किसी भी तरह की गैंग गतिविधि या प्रवासी समुदाय को धमकाने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।
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