April 18, 2026

कजरी तीज 2025: इस बार खास है सुहागिनों का पर्व, जानिए कब है व्रत, क्यों रखा जाता है और क्या है इससे जुड़ी पौराणिक कथा

हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि आते ही सुहागिनों के चेहरे पर एक अलग ही चमक देखने को मिलती है। सावन की हरियाली और झूले की मस्ती के बीच कजरी तीज का व्रत न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि इसमें लोक परंपराओं की भी गहराई से झलक मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कजरी तीज का सीधा संबंध माता पार्वती के 108 जन्मों से जुड़ा हुआ है? और आखिर क्यों महिलाएं इस दिन नीम की टहनी की पूजा करती हैं? आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कजरी तीज से जुड़ी हर वो बात जो आपको जाननी चाहिए।

इस वर्ष कजरी तीज 12 अगस्त 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है। खासकर महिलाओं के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के उद्देश्य से उपवास रखती हैं।

कजरी तीज की पूजा विधि भी बेहद विशिष्ट होती है। इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनती हैं और घर में विशेष पूजा स्थल बनाती हैं। वहां नीम की टहनी को स्थापित किया जाता है और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा में खासतौर पर फूल, फल, मिठाई, और सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है, जिनमें चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, महावर आदि शामिल होते हैं। महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और रात को चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं।

इस पर्व में कजरी गीत और लोक परंपराओं की भी अहम भूमिका होती है। महिलाएं समूह में इकट्ठा होकर पारंपरिक लोकगीत गाती हैं, झूले पर बैठकर कजरी के सुरों में खुद को रमाती हैं। गांवों और कस्बों में यह दिन मेलों और लोक नृत्यों के आयोजन के लिए भी जाना जाता है। खास बात यह है कि यह पर्व सावन की विदाई के समय आता है, जिससे इसकी भावनात्मक अहमियत भी बढ़ जाती है।

अगर हम कजरी तीज से जुड़ी पौराणिक कथा की बात करें तो इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक तपस्या की थी। आखिरकार उनके कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इस उपवास और तप की याद में ही महिलाएं कजरी तीज का व्रत रखती हैं और मां पार्वती की तरह अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह कथा न केवल धार्मिक आस्था को पुष्ट करती है, बल्कि स्त्री शक्ति और समर्पण की मिसाल भी पेश करती है।

इस तरह कजरी तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय नारी की श्रद्धा, संस्कृति और सौभाग्य की अमिट पहचान है। यह पर्व बताता है कि जब श्रद्धा अटूट हो, तो देवता भी प्रसन्न होते हैं। इसलिए इस 12 अगस्त को जब देशभर की महिलाएं उपवास करेंगी, पूजा करेंगी और कजरी गीतों की धुन में डूबेंगी, तो उनका हर भाव ईश्वर तक पहुंचेगा — यही है कजरी तीज का असली संदेश।

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