April 20, 2026

थार के रेगिस्तान से जासूसी तक: ‘ट्रैवल व्लॉगर’ ज्योति मल्होत्रा का पाकिस्तान कनेक्शन कैसे हुआ उजागर?

एक साधारण ट्रैवल व्लॉगर के वीडियो से उठता है संदेह, और फिर खुलते हैं ऐसे राज जो सीधे देश की सुरक्षा से जुड़ते हैं। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स की चहेती रही ज्योति मल्होत्रा का नाम अब जासूसी और देश विरोधी गतिविधियों में सामने आ चुका है। यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं, जहां एक महिला यूट्यूबर के कैमरे के पीछे छिपा था देश की सीमाओं से खिलवाड़ करने वाला खतरनाक मंसूबा।

 

हरियाणा के हिसार की रहने वाली ज्योति मल्होत्रा, जो ‘ट्रैवल विद जो’ नामक यूट्यूब चैनल चलाती हैं, हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों की नजर में तब आईं, जब उन्होंने राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले में तीन दिन तक रुककर थार के रेगिस्तान में घूमते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा के पास कई संवेदनशील इलाकों के वीडियो शूट किए। इन वीडियो में वे मुनाबाव रेलवे स्टेशन और झेलून गांव जैसे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचती हैं और बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से अवलोकन करती नजर आती हैं।

 

विडंबना देखिए कि ज्योति इन गांवों में जाकर न सिर्फ आम लोगों से घुलमिल जाती हैं, बल्कि बकरी का दूध निकालते हुए और ग्रामीण जीवन पर बात करते हुए बॉर्डर क्रॉसिंग जैसे सवाल पूछती हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों से यह तक पूछा कि “बॉर्डर पार करने में कितना समय लगता है?” और “पाकिस्तान की सीमा कितनी दूर है?”

 

वीडियो में ज्योति तारों की बाड़ की ओर इशारा करती हैं और कहती हैं – “उस पार पाकिस्तान है, इस पार हिंदुस्तान। अगर आप उधर जाएंगे तो पाकिस्तान की सीमा में पहुंच जाएंगे और वहां आपको पाकिस्तानी आर्मी नजर आएगी।”

 

यह सब महज ट्रैवल व्लॉगिंग नहीं था, बल्कि देश की सीमाओं और सुरक्षा तंत्र की रेकी करने की सोची-समझी साजिश थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उन्होंने पाकिस्तान से लगते क्षेत्रों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया, जिससे सीमा की स्थिति और तैनाती की जानकारी सार्वजनिक हो गई। यही नहीं, एजेंसियों को मिली वॉट्सऐप चैट्स से यह साफ हो गया है कि ज्योति ISI के संपर्क में थीं और बातचीत कोडवर्ड में हो रही थी, जिसे डिकोड करने की कोशिशें अभी जारी हैं।

 

ज्योति की गिरफ्तारी पंजाब के मलेरकोटला से गिरफ्तार गजाला नामक महिला से पूछताछ के बाद हुई, जिससे पाकिस्तान के जासूसी नेटवर्क से जुड़ी कई जानकारियाँ सामने आईं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें ज्योति भी शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों की उम्र 24 से 34 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

 

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पिछले दो वर्षों में ज्योति तीन बार पाकिस्तान, एक बार चीन, यूएई, बांग्लादेश, भूटान और थाईलैंड की यात्रा कर चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, वह दो साल पहले पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी ‘दानिश’ के संपर्क में आई थीं और वहां के खुफिया अधिकारियों से भी मुलाकात कर चुकी थीं।

 

गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ट्रैवल वीडियो की आड़ में वह संवेदनशील इलाकों में जाकर वहां की तस्वीरें और सूचनाएं जुटा रही थीं और पाकिस्तान को भेज रही थीं। उनके यूट्यूब चैनल पर कई ऐसे वीडियो हैं जो सीधे-सीधे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

 

फिलहाल ज्योति मल्होत्रा पुलिस की हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है। सवाल यह है कि सोशल मीडिया की चमक-धमक में छिपे ऐसे खतरे क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए आने वाले समय में और भी चुनौती बनेंगे? और क्या ‘कैमरे के पीछे’ नजर आती मासूमियत, असल में दुश्मन का चेहरा बन सकती है?

 

यह मामला ना सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर रहा है, बल्कि हमें भी सोचने पर मजबूर करता है — जब सीमा की रेखाएं कैमरे के लेंस में कैद होकर दुश्मन के पास पहुंचती हैं, तब असली खतरा दिखाई नहीं देता, बल्कि महसूस होता है।

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