टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद और घातक गेंदबाजों में शुमार जसप्रीत बुमराह लंबे समय तक विपक्षी टीमों के लिए खौफ का दूसरा नाम रहे हैं। नई गेंद हो या डेथ ओवर्स, बुमराह की मौजूदगी मात्र से बल्लेबाजों की रणनीति बदल जाया करती थी। उनकी यॉर्कर, धीमी गेंद और अनोखा एक्शन उन्हें बाकी तेज गेंदबाजों से अलग बनाता था। लेकिन पिछले कुछ महीनों में तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। अब वही बुमराह लगातार रन लुटाते दिख रहे हैं, खासकर उन ओवरों में जहां उन्हें मैच फिनिशर माना जाता था। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उनकी गेंदों पर जिस तरह की पिटाई देखने को मिली, उसने क्रिकेट विशेषज्ञों और फैंस दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो महीनों में ही बुमराह चार बार ऐसे मुकाबलों में महंगे साबित हुए हैं, जहां उनसे मैच का रुख बदलने की उम्मीद थी। डेथ ओवर्स में उनकी गेंदों पर बाउंड्री लगना अब असामान्य नहीं रह गया है। बल्लेबाज न सिर्फ उनकी यॉर्कर का जवाब ढूंढ रहे हैं, बल्कि स्लोअर बॉल और लेंथ में जरा-सी चूक को भी बड़े शॉट्स में तब्दील कर रहे हैं। टी20 इंटरनेशनल में जहां मार्जिन बहुत कम होता है, वहां बुमराह की यह गिरावट टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
इस प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी पुरानी इंजरी को माना जा रहा है। बुमराह लंबे समय तक चोट से जूझते रहे और करीब एक साल क्रिकेट से दूर भी रहे। वापसी के बाद उन्होंने कुछ मैचों में अपनी पुरानी चमक जरूर दिखाई, लेकिन निरंतरता अब तक नजर नहीं आई है। इंजरी के बाद किसी भी तेज गेंदबाज के लिए पहले जैसी लय और आत्मविश्वास हासिल करना आसान नहीं होता। बुमराह के मामले में भी ऐसा ही लगता है कि उनका शरीर अब पहले जैसी तीव्रता और नियंत्रण के साथ जवाब नहीं दे पा रहा, जिसका फायदा बल्लेबाज उठा रहे हैं।
पिछले 12 महीनों के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। जहां एक समय बुमराह की इकॉनमी और स्ट्राइक रेट टी20 क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती थी, वहीं अब उनके आंकड़े औसत गेंदबाजों के करीब जाते दिख रहे हैं। विकेट तो मिल रहे हैं, लेकिन उसकी कीमत कहीं ज्यादा रन देकर चुकानी पड़ रही है। डेथ ओवर्स में उनका रोल विकेट निकालने से ज्यादा रन रोकने का होता है, लेकिन हालिया मैचों में यही भूमिका कमजोर कड़ी बनकर उभरी है।
इसके अलावा, विपक्षी टीमों की रणनीति भी बदल चुकी है। बल्लेबाज अब बुमराह के खिलाफ ज्यादा आक्रामक नजरिया अपनाते हैं। वे जानते हैं कि उनकी गेंदों पर रन बनाना आसान नहीं है, इसलिए पहले से तैयारी के साथ मैदान में उतरते हैं। वीडियो एनालिसिस और डेटा के दौर में बुमराह की गेंदबाजी पैटर्न को पढ़ना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। इसका असर साफ दिख रहा है कि बल्लेबाज बिना दबाव के बड़े शॉट खेलने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि बुमराह की धार पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वह अभी भी भारत के सबसे अनुभवी और मैच जिताऊ गेंदबाजों में से एक हैं। लेकिन मौजूदा फॉर्म यह संकेत जरूर देता है कि उन्हें अपनी फिटनेस, गेंदबाजी की विविधता और रणनीति पर फिर से काम करने की जरूरत है। टीम मैनेजमेंट के लिए भी यह जरूरी हो जाता है कि बुमराह के वर्कलोड को सही तरीके से मैनेज किया जाए, ताकि वह बड़े टूर्नामेंटों में अपनी पुरानी लय हासिल कर सकें। पिछले 12 महीनों का प्रदर्शन साफ कहता है कि सवाल उठ रहे हैं, और इन सवालों का जवाब बुमराह को मैदान पर अपने प्रदर्शन से ही देना होगा।
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