ये है जेफरी एपस्टीन फाइल्स का खौफनाक राज, जिसने दुनिया की सियासत को हिला दिया
रहस्यों से भरी एपस्टीन फाइल्स एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अमेरिकी अरबपति और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़, वीडियो और ई-मेल सामने आने के बाद दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है। इन फाइल्स में उसके काले कारनामों, प्रभावशाली लोगों से संबंधों और कथित “रेड रूम” जैसे ठिकानों का जिक्र है, जिसने इस पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है।
पूरा मामला उस वक्त और गहराया, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़ी जांच फाइलों का नया बैच सार्वजनिक किया। इन दस्तावेज़ों में पेरिस स्थित उसके आलीशान फ्लैट, वहां बने कथित रेड रूम और प्राइवेट पार्टियों के दावों का उल्लेख है। आरोप है कि इस रेड रूम में रसूखदार मेहमानों के लिए निजी कार्यक्रम आयोजित होते थे। हालांकि, जांच एजेंसियां लगातार यह स्पष्ट कर रही हैं कि फाइल्स में दर्ज हर नाम का मतलब अपराध में शामिल होना नहीं है, लेकिन खुलासों ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सस्पेंस यहीं खत्म नहीं होता। एपस्टीन फाइल्स में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी पुरानी तस्वीरों, मुलाकातों और सामाजिक संबंधों का भी जिक्र सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और एपस्टीन के बीच 1990 के दशक में सामाजिक मेल-जोल रहा था। ट्रंप पहले ही यह कह चुके हैं कि उन्होंने एपस्टीन से दूरी बना ली थी और किसी भी अवैध गतिविधि से उनका कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी, फाइल्स में नाम आने से अमेरिकी राजनीति में बहस तेज हो गई है।
इसी बीच भारत में उस समय सियासी हलचल मच गई, जब एपस्टीन से जुड़े एक पुराने ई-मेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 की इजरायल यात्रा का संदर्भ सामने आया। इस ई-मेल के सार्वजनिक होते ही विपक्ष ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। मामला बढ़ता देख भारत सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और इसे सिरे से खारिज कर दिया।
विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि ई-मेल में प्रधानमंत्री की आधिकारिक इजरायल यात्रा के तथ्य के अलावा बाकी सभी बातें एक दोषी अपराधी की कल्पना और निराधार टिप्पणी से ज्यादा कुछ नहीं हैं। सरकार ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री या भारत सरकार का एपस्टीन के किसी भी अवैध कृत्य से कोई संबंध नहीं है और इस तरह के दावों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
कुल मिलाकर, एपस्टीन फाइल्स आज सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, साजिशों और अफवाहों का केंद्र बन चुकी हैं। एक तरफ अमेरिका में ट्रंप को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत ने पीएम मोदी के नाम को लेकर कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। जांच एजेंसियां अब भी फाइल्स की पड़ताल में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस सनसनीखेज मामले से जुड़े और भी खुलासे सामने आ सकते हैं।
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