पहलगाम हमले की दहशत: ‘जब गोलियों की आवाज़ आई, हम भेलपुरी खा रहे थे…’ – एक जीवित बचे की दर्दनाक गवाही
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों द्वारा किए गए नरसंहार ने देश को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां इस हमले में 26 लोगों की जान गई, वहीं कई ऐसे भी हैं जो महज चंद कदमों के फासले से मौत को मात देकर लौटे हैं। लेकिन इस ‘बच जाना’ भी अब उनके लिए जीवनभर का मनोवैज्ञानिक जख्म बन गया है। ऐसे ही एक जोड़े हैं राजस्थान के जयपुर निवासी मिहिर सोनी और उनकी पत्नी कोमल, जो हमले के वक्त घटनास्थल पर ही मौजूद थे।
‘हम भेलपुरी खा रहे थे और तभी गोलियां चलने लगीं’
मिहिर ने बताया कि, “हम जैसे ही पहलगाम पहुंचे, मौसम अच्छा था और माहौल खुशनुमा लग रहा था। हमने भेलपुरी खरीदी और एक कोने में बैठकर खाने लगे। तभी अचानक गोलियों की आवाज़ गूंजने लगी। कुछ ही पल में अफरातफरी मच गई, लोग इधर-उधर चीखते-भागते दिखे।”
जान बचाने को 4 हज़ार में लिए घोड़े
मिहिर की पत्नी कोमल ने बताया कि वे हमले के वक्त सिर्फ दस कदम की दूरी पर थे। “हमने बिना समय गंवाए 4,000 रुपये में घोड़े किराए पर लिए और वहां से निकल भागे।” उन्होंने यह भी बताया कि जब तक वे पहलगाम की सीमा तक पहुंचे, एक भी सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आया। सुरक्षाबलों को भी हमले की जानकारी बाद में मिली। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद की।
हम अब कभी कश्मीर नहीं जाएंगे…
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लौटने के बाद कोमल बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “हम अब कभी कश्मीर नहीं जाएंगे। आज हम जिंदा हैं, यही बहुत है।” उनकी आंखों में वह डर अब भी साफ झलक रहा था।
दूसरे पर्यटक भी हुए हमले के गवाह
महाराष्ट्र के नांदेड़ से आए साक्षी और कृष्णा लोलगे भी उसी वक्त घटनास्थल के पास थे। साक्षी ने बताया कि, “हम हमले के करीब 15-20 मिनट पहले ही वहां से निकले थे। गोली चलने की आवाज सुनकर हम पास के होटल में पहुंचे, जहां स्थानीय लोगों ने बहुत मदद की।”
हमले के समय कोई सुरक्षा नहीं थी, अब कौन भरोसा करेगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हमले के समय न तो सेना का कोई जवान था, न ही पुलिस का कोई सुराग। यह सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पर्यटन स्थल पर इतनी बड़ी चूक ने न केवल विश्वास तोड़ा है, बल्कि लोगों की जान भी ले ली।
सरकार की सख्त प्रतिक्रिया: सिंधु जल संधि पर ब्रेक
भारत सरकार ने इस जघन्य आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की सीसीएस बैठक में पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही पाकिस्तान के उच्चायुक्त को समन किया गया और रक्षा, वायु एवं नौसेना सलाहकारों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
यह हमला भारत की आत्मा पर वार था: पीएम मोदी
बिहार के मधुबनी में भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह हमला भारत की आत्मा पर किया गया दुस्साहस है। आतंकियों की बची-खुची जमीन को अब मिट्टी में मिला दिया जाएगा।”
हमले की पृष्ठभूमि और अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी
सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण कश्मीर के जंगलों में सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हेलीकॉप्टर से इलाके की मैपिंग की जा रही है और आतंकियों के हर ठिकाने को खंगाला जा रहा है। यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा सकती है।
इस हमले की यादें और जख्म जीवनभर रहेंगे
जो लोग इस हमले में जिंदा बचे हैं, उनके ज़ेहन में इस त्रासदी की छाप हमेशा बनी रहेगी। गोलियों की आवाज़ें, चीख-पुकार, और अपनों को खोने का मंजर… ये सभी दृश्य आज भी उनकी आंखों के सामने हैं।
यह पहलगाम हमला एक बार फिर इस बात की चेतावनी है कि जब तक आतंक के जड़ को पूरी तरह उखाड़ा नहीं जाता, तब तक शांति की कल्पना महज़ एक भ्रम रह जाएगी।
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