May 3, 2026

जम्मू-कश्मीर: बेटे–भाई से मिलने न देने पर खुद को आग लगाने वाले बिलाल वानी की मौत

दिल्ली ब्लास्ट केस में बेटे से पूछताछ जारी, घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों पर कई सवाल

जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड में खुद को आग लगाने वाले मेवा विक्रेता बिलाल अहमद वानी की अस्पताल में मौत हो गई है। बेटे और भाई को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद उनसे मुलाकात न होने पर वानी ने यह चरम कदम उठाया था। रविवार देर शाम उनकी हालत बिगड़ी और उपचार के दौरान सोमवार तड़के उन्होंने दम तोड़ दिया। यह घटना न केवल सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि परिवारों के साथ मानवीय व्यवहार को लेकर भी बहस छेड़ रही है।

अधिकारियों के अनुसार, बिलाल अहमद वानी, उनके भाई और उनके बेटे जसीर बिलाल को एक आतंकवादी मॉड्यूल मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के बाद बिलाल को तो छोड़ दिया गया, लेकिन उनके बेटे और भाई को नहीं रिहा किया गया। जब वानी ने कई बार निवेदन करने के बावजूद अपने परिजनों से मिलने की अनुमति नहीं मिली, तो उन्होंने काजीगुंड बाजार में स्वयं पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली। उन्हें गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में अनंतनाग के अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर एसएमएचएस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, बिलाल अहमद वानी, व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य आरोपी माने जा रहे डॉ. मुजफ्फर राठेर के पड़ोसी थे। राठेर के अफगानिस्तान में छिपे होने की आशंका है, जबकि उसका भाई डॉ. आदिल राठेर 6 नवंबर को सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मॉड्यूल का नेटवर्क व्यापक है, और इसके सदस्यों से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है। हालांकि, जिस तरह वानी को मानसिक दबाव और निराशा ने आत्मदाह जैसा कदम उठाने पर मजबूर किया, वह सुरक्षा एजेंसियों की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

घटना के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के परिवारों को उनसे मिलने से रोकना न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि यह लोगों को भीतर तक तोड़ देता है। महबूबा ने चेतावनी दी कि बेतरतीब गिरफ्तारियों और परिवारों को मानसिक प्रताड़ना देने की प्रक्रिया युवाओं को भय, अविश्वास और कट्टरता की ओर धकेल सकती है। उन्होंने मांग की कि पुलिस कम से कम परिजनों को मुलाकात की अनुमति दे, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

इस दुखद घटना ने घाटी में मानवाधिकार और पुलिस प्रक्रियाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक नेताओं ने इसे सुरक्षा एजेंसियों की असंवेदनशीलता का परिणाम बताया है। वहीं, पुलिस का कहना है कि केस संवेदनशील है, इसलिए मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। फिलहाल, दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल से जुड़े मामलों की जांच जारी है और वानी के बेटे से पूछताछ की जा रही है। लेकिन बिलाल वानी की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, जिनके उत्तर सरकार और पुलिस को देने पड़ेंगे।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!