जम्मू लैंडस्लाइड हादसा: मुजफ्फरनगर के 6 श्रद्धालुओं की मौत, सरकार पर लापरवाही के आरोप
जम्मू-कश्मीर के माता वैष्णो देवी मार्ग पर हुए लैंडस्लाइड हादसे ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है। इस हादसे में अब तक 6 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल और कुछ लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पीड़ित परिवार सरकार और प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर सुरक्षा इंतजाम होते और आपदा से निपटने की उचित तैयारी की गई होती तो इतनी बड़ी त्रासदी से बचा जा सकता था।
रामपुरी मोहल्ले के रहने वाले संदीप कुमार ने बताया कि इस दर्दनाक हादसे में उनकी भाभी रामवीरी (48) और भतीजी अंजलि (22) की मौत हो गई है। उनका परिवार तीन दिन पहले ही माता वैष्णो देवी की यात्रा पर निकला था। कटरा पहुंचने के बाद उनकी आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी। संदीप का आरोप है कि प्रशासन केवल बयानबाजी कर रहा है, लेकिन पीड़ित परिवारों को वास्तविक मदद अब तक नहीं मिल पाई है। उन्होंने मांग की है कि चाहे उनके परिजन मृत हों, घायल हों या सुरक्षित, उन्हें तत्काल वापस लाया जाए।
इसी यात्रा में शामिल देशराज सिंह का परिवार भी हादसे का शिकार हुआ। उन्होंने बताया कि उनके दो पोते—अनंत कुमार और दीपेश कुमार अब भी लापता हैं। वहीं उनके बेटे अजय कुमार और पोती पूर्वी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। देशराज ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार सिर्फ कागजी वादे कर रही है, लेकिन अब तक लापता बच्चों की तलाश के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण पीड़ित परिवार और गहरे संकट में फंसते जा रहे हैं।
इस हादसे के शिकार हुए श्रद्धालुओं का 23 लोगों का ग्रुप रामपुरी मोहल्ले से गया था। हादसे के बाद इस टोली के 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं और कुछ का अभी तक पता नहीं चल पाया है। परिजनों ने गुस्से में कहा कि सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। हर साल लाखों लोग वैष्णो देवी यात्रा पर जाते हैं, लेकिन रास्ते पर लगातार हो रही घटनाओं से लगता है कि व्यवस्थाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान ने गुरुवार को पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने स्वीकार किया कि हादसे में जिले के लोगों की बड़ी जानहानि हुई है। बालियान ने कहा कि कल तक सिर्फ कार्तिक की मौत की खबर थी, लेकिन अब पांच और लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि नेताओं का आना-जाना और आश्वासन देना उनके घावों पर मरहम नहीं, बल्कि राजनीति चमकाने का जरिया है। उन्हें जरूरत है ठोस कार्रवाई और त्वरित राहत की।
इस पूरे हादसे ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं का आरोप है कि अगर मौसम और भूस्खलन की आशंका पहले से थी तो यात्रियों को रोका क्यों नहीं गया। वहीं, लापता लोगों के परिवार सवाल कर रहे हैं कि आखिर बचाव अभियान में इतनी सुस्ती क्यों बरती जा रही है। मुजफ्फरनगर में मातम पसरा हुआ है, लेकिन सरकार अब तक पीड़ितों के आंसू पोंछने में नाकाम साबित हो रही है।
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