जामा मस्जिद में बिना अनुमति रेलिंग लगाने के मामले में जफर अली के खिलाफ वारंट, कोर्ट में पेशी के दौरान कड़ी सुरक्षा
संभल में स्थित जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर 2018 में बिना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की अनुमति के स्टील की रेलिंग लगवाने के मामले में मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली के खिलाफ न्यायालय ने वारंट जारी किया है। इस मामले में एएसआई ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया कि जामा मस्जिद के संरक्षित हिस्से में बिना अनुमति के यह बदलाव किया गया है, जिससे मस्जिद की ऐतिहासिकता और मूल स्वरूप को क्षति पहुंची है।
आरोप है कि मस्जिद की कमेटी ने बिना कोई स्वीकृति लिए और एएसआई से अनुमति प्राप्त किए बिना सीढ़ियों पर स्टील की रेलिंग लगवा दी थी, जो एक संरक्षित धरोहर के लिए अवैध था। एएसआई की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान यह भी सामने आया कि मस्जिद के कुछ अन्य हिस्सों में भी बिना अनुमति के निर्माण कार्य किए गए थे, जो एएसआई के संरक्षण में आते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का बदलाव या निर्माण बिना एएसआई की स्वीकृति के गैरकानूनी होता है।
मंगलवार को जफर अली को सिविल न्यायालय संभल में पेश किया गया, जहां उनके खिलाफ मामले की सुनवाई हुई। पेशी के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जफर अली पहले भी हिंसा के एक मामले में आरोपी रहे हैं और इस समय जेल में बंद हैं। उनकी पेशी के दौरान सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानियां बरती गईं, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या विरोध से बचा जा सके।
इस मामले के बाद जफर अली और मस्जिद कमेटी पर कानून के तहत कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Share this content:
