April 22, 2026

जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले क्यों भगवान ने धारण किया था गजानन वेश? जानिए पुरी की इस अनोखी लीला की पौराणिक कथा

पुरी में हर साल आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का बड़ा केंद्र होती है। इस भव्य यात्रा में भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हुए गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) जाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ एक खास रूप धारण करते हैं, जिसे ‘गजानन वेश’ कहा जाता है? यह रूप वह स्नान पूर्णिमा के दिन धारण करते हैं और इसके पीछे एक अत्यंत भावुक और भक्तिमय कथा जुड़ी हुई है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार महाराष्ट्र से गणेश के एक परम भक्त गणपति भट्ट पुरी धाम पहुंचे। वे पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन वहां उन्हें गणेश जी का कोई मंदिर नहीं मिला। इससे वे दुखी हो गए। उनकी इस गहन भक्ति और संकल्प को देखकर भगवान जगन्नाथ ने उन्हें निराश नहीं किया। उन्होंने गजानन का वेश धारण कर खुद को गणपति रूप में प्रकट किया और गणपति भट्ट को दर्शन दिए।

यह घटना भगवान जगन्नाथ की करुणा और भक्तवत्सलता का उदाहरण है। यह दिखाता है कि जब भक्त पूर्ण समर्पण और निष्कलंक भाव से भगवान को पुकारता है, तो वे किसी भी रूप में दर्शन देने में संकोच नहीं करते।

गजानन वेश की यह घटना ‘अनासार काल’ के दौरान होती है — यह वही समय होता है जब ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान का विशेष स्नान होता है, जिसके बाद उन्हें ‘बुखार’ आ जाता है और वह करीब 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस एकांतवास के बाद ही भगवान आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भव्य रथ यात्रा के लिए बाहर आते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं।

इस पूरी परंपरा में भगवान के रूप, भावना और भक्त के प्रति प्रेम की ऐसी झलक देखने को मिलती है, जो इस पर्व को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अध्यात्मिक अनुभव में बदल देती है।

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