इंडोनेशिया में हिंसा भड़की, वित्त मंत्री का घर लूटा; राष्ट्रपति ने चीन दौरा रद्द किया
इंडोनेशिया में पिछले एक हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसा का रूप ले चुका है। राजधानी जकार्ता से लेकर सुराबाया, योग्याकर्ता, मकास्सर और कई अन्य बड़े शहरों में हालात बिगड़ गए हैं। प्रदर्शनकारी सांसदों को दिए जा रहे महंगे भत्तों और सरकार की नीतियों से नाराज हैं। शनिवार देर रात दक्षिण तंगेरांग में प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री मुलयानी इंद्रावती के घर पर हमला कर लूटपाट की। भीड़ ने घर की सुरक्षा व्यवस्था तोड़ दी और सैनिकों पर हमला करते हुए कीमती सामान ले गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो को अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा रद्द करनी पड़ी।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ हाल ही में सामने आई उस जानकारी को माना जा रहा है, जिसमें खुलासा हुआ था कि इंडोनेशिया के 580 सांसदों को वेतन के अलावा हर महीने 50 लाख रुपिया यानी करीब 3,075 डॉलर मकान भत्ते के रूप में दिए जा रहे हैं। यह रकम राजधानी जकार्ता के न्यूनतम वेतन से लगभग 10 गुना अधिक है। महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता के लिए यह खबर ‘आग में घी डालने’ जैसी साबित हुई। इसके बाद से आम लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार व नेताओं के खिलाफ गुस्सा खुलकर फूट पड़ा।
हिंसा का सबसे बड़ा ट्रिगर 29 अगस्त को तब बना, जब जकार्ता में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में पुलिस की बख्तरबंद गाड़ी से एक डिलीवरी राइडर की मौत हो गई। यह घटना वीडियो में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इसके बाद सुराबाया, मेदान, मनाडो और पापुआ जैसे शहरों में भी माहौल बिगड़ गया। लोगों ने सड़कों पर बैरिकेड लगाए, सिग्नल तोड़े और यातायात को घंटों बाधित किया। कई जगह पुलिस और भीड़ के बीच झड़पें हुईं, लेकिन हालात काबू से बाहर रहे।
इस बीच केवल वित्त मंत्री ही नहीं बल्कि कई अन्य नेताओं के घरों पर भी भीड़ ने हमला किया। नास्देम पार्टी की सांसद और पूर्व अभिनेत्री नाफा उरबाक के घर पर भी तोड़फोड़ और लूटपाट हुई। इसी तरह पूर्व टीवी होस्ट और सांसद उया कुया तथा विधायक एको पैट्रियो के घर भी दंगाइयों का निशाना बने। उया और एको हाल ही में संसद के वार्षिक सत्र के दौरान डांस करने की वजह से चर्चा में आए थे और उनकी आलोचना भी हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने उनके आलीशान घरों से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान और यहां तक कि घरेलू सिलेंडर तक लूट लिए।
लगातार बढ़ती हिंसा से इंडोनेशिया में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जनता का गुस्सा जहां महंगाई और बेरोजगारी से उपजा है, वहीं सांसदों के ऊंचे भत्तों ने आग को और भड़का दिया है। विपक्ष भी सरकार पर हमला कर रहा है और राष्ट्रपति प्रबोवो से स्थिति को तुरंत काबू में लेने की मांग कर रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है, क्योंकि मौजूदा हालात ने देश को बड़े राजनीतिक और सामाजिक असंतोष की ओर धकेल दिया है।
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