April 30, 2026

इंडिगो में क्यों मचा परिचालन संकट? नए नियमों का सबसे बड़ा असर इसी कंपनी पर क्यों दिखा

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो बीते कुछ दिनों से गंभीर परिचालन अव्यवस्था का सामना कर रही है। कंपनी को 550 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जबकि कई उड़ानें घंटों देरी से रवाना हुईं। इससे हजारों यात्रियों का समय, पैसा और योजनाएँ प्रभावित हुईं। एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की लंबी कतारें दिखाई दीं और सोशल मीडिया पर गुस्से भरे संदेश लगातार वायरल होने लगे। सवाल उठ रहा है कि आखिर नए नियमों का सबसे ज्यादा असर इंडिगो पर ही क्यों पड़ा और क्या कंपनी इस स्थिति के लिए पहले से तैयार नहीं थी।

 

हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत कई बड़े एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को घंटों इंतज़ार करना पड़ा। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें 10 से 12 घंटे तक बिना किसी स्पष्ट जानकारी के एयरपोर्ट पर बैठना पड़ा। एक यात्री ने लिखा कि वे शाम 6 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक हैदराबाद एयरपोर्ट पर फंसे रहे, लेकिन इंडिगो की पुणे फ्लाइट के बारे में कोई ठोस अपडेट नहीं दिया गया। इसी तरह कई अन्य यात्रियों ने दावा किया कि स्टाफ हर दो घंटे में यात्रा को आगे बढ़ाने की बात कहता रहा, ताकि ठहरने की व्यवस्था न करनी पड़े। इस तरह की शिकायतों ने एयरलाइन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

 

इंडिगो ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि हालिया अव्यवस्था “कई अनजानी परिचालन चुनौतियों” की वजह से हुई है। कंपनी ने छोटी तकनीकी दिक्कतों, सर्दियों के मौसम में शेड्यूल बदलने, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम पर बढ़ते लोड और नए लागू हुए क्रू रोस्टरिंग नियम (Flight Duty Time Limitations – FDTL) को जिम्मेदार बताया। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि इंडिगो द्वारा बताई गई अधिकांश वजहें सामान्य परिचालन समस्याएँ हैं, लेकिन असली झटका नए FDTL नियमों ने दिया, जिन्हें लागू करने में कंपनी ने पर्याप्त तैयारी नहीं की।

 

DGCA ने जनवरी 2024 में FDTL नियमों में बड़े बदलाव किए थे, जिनका उद्देश्य पायलटों और क्रू को अधिक आराम देना था। नए नियमों के तहत साप्ताहिक आराम समय 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया, नाइट ड्यूटी विंडो 5 से बढ़ाकर 6 घंटे कर दी गई और नाइट लैंडिंग की संख्या भी सीमित कर दी गई। पहले एक हफ्ते में 6 नाइट ड्यूटी होती थीं, जबकि अब इसे घटाकर केवल 2 कर दिया गया है। नाइट शिफ्ट के बाद अनिवार्य आराम 10 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया। इन बदलावों के कारण एयरलाइंस को अपने रोस्टर सिस्टम में बड़े पैमाने पर फेरबदल करने पड़े। इंडिगो के विशाल नेटवर्क और भारी उड़ान आवृत्ति की वजह से उसका रोस्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और पर्याप्त क्रू उपलब्ध न होने के कारण उड़ानें बाधित होने लगीं।

 

इंडिगो रोजाना 2,200 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करती है, जो एयर इंडिया से लगभग दोगुना है। इतने बड़े ऑपरेशनल साइज के कारण नए नियमों का असर भी सबसे अधिक इसी कंपनी पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंडिगो समय रहते अपने रोस्टर और क्रू प्लानिंग में बदलाव करती, तो इतने बड़े पैमाने पर उड़ान कैंसिलेशन से बचा जा सकता था। फिलहाल कंपनी स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है, लेकिन यात्रियों की नाराज़गी कम होती नहीं दिख रही है।

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