April 17, 2026

भारत और चीन में व्यापार विस्तार, लेकिन वैश्विक मंदी की आशंका बनी रही: संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट

विश्व व्यापार के संदर्भ में एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक आर्थिक स्थिति को लेकर कुछ अहम संकेत दिए हैं। विकासशील देशों, विशेष रूप से भारत और चीन, ने 2024 की चौथी तिमाही में अपेक्षाकृत बेहतर व्यापार विस्तार हासिल किया है, लेकिन इस सकारात्मक संकेत के बावजूद रिपोर्ट में आगामी तिमाहियों में वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका भी जताई गई है। क्या यह व्यापारिक वृद्धि स्थायी है, या फिर वैश्विक आर्थिक मंदी के खतरे से यह सब कुछ प्रभावित हो सकता है?

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) की इस ताजातरीन रिपोर्ट में, वैश्विक व्यापार में वृद्धि के कुछ खास रुझानों पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक व्यापार लगभग 33,000 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो कि लगभग 1,200 अरब डॉलर या 9 प्रतिशत का विस्तार दिखाता है। यह रिपोर्ट मार्च की शुरुआत तक के आंकड़ों का अध्ययन करती है और इसमें यह बताया गया है कि चीन और भारत ने अपनी चौथी तिमाही में मजबूत व्यापारिक गति दर्ज की, जबकि कई विकसित देशों में व्यापार संकुचन देखा गया।

इसके अलावा, अमेरिका भी प्रमुख व्यापारिक चालक के रूप में बना रहा, लेकिन उसमें आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी आई। विशेष रूप से भारत और दक्षिण अफ्रीका के लिए सेवा व्यापार में भी सकारात्मक रुझान देखे गए। भारत ने अपनी चौथी तिमाही में माल व्यापार में 8% तिमाही आयात वृद्धि और 7% तिमाही निर्यात वृद्धि दर्ज की। वहीं, सालाना आधार पर भारत के निर्यात में केवल 2% वृद्धि रही।

लेकिन इसके साथ ही, रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ चिंता भी जताई है। व्यापार में आए ये सकारात्मक बदलाव कहीं न कहीं वैश्विक मंदी के संकेतों से भी जुड़े हुए हैं। क्या इस स्थिति में व्यापार के ये सकारात्मक आंकड़े टिकाऊ होंगे, या आने वाले समय में वैश्विक मंदी के प्रभाव से यह सभी परिणाम उलट जाएंगे?

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