April 17, 2026

भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में महत्वपूर्ण मोड़, मोदी और उर्सुला वोन डेर लेयेन के बीच बैठक पर नजरें

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय यूनियन (EU) की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन के बीच होने वाली मुलाकात को लेकर अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आ रहे हैं। यह मुलाकात, जो भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक नया आयाम जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, खासकर यूक्रेन और रूस युद्ध के संदर्भ में, दुनिया भर की निगाहों में है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में भारत अपनी विदेश नीति और रुख को स्पष्ट करने का प्रयास करेगा, विशेषकर यूक्रेन में सैनिक भेजने और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के मामलों पर।

भारत का स्पष्ट रुख: यूरोपीय संघ के प्रस्तावों का विरोध

बताया जा रहा है कि भारत यूरोपीय यूनियन के यूक्रेन में सैनिक भेजने के प्रस्ताव से सहमत नहीं है। भारत ने पहले ही इस तरह के प्रस्तावों के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है और कहा है कि वह यूक्रेन में कोई शांति सेना भेजने का पक्षधर नहीं है। इसके अलावा, भारत ने यूरोपीय संघ से यह भी स्पष्ट किया है कि वह रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करेगा। यह मुद्दे प्रधानमंत्री मोदी और उर्सुला वोन डेर लेयेन के बीच होने वाली बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा के केंद्र बिंदु हो सकते हैं।

यूरोपीय संघ की यात्रा: ऐतिहासिक महत्व

उर्सुला वोन डेर लेयेन का यह भारत दौरा विशेष महत्व रखता है। वे 27-28 फरवरी को अपने दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आईं हैं, जिसमें उनके साथ यूरोपीय संघ के 22 उच्च स्तरीय कमिश्नर भी मौजूद हैं। यह यूरोपीय आयोग का पहला दौरा है, जिसमें पूरे आयोग का भारत आगमन हुआ है, जो भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ का प्रतीक है। इस दौरे का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत करना है।

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों की नयी दिशा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच पिछले दो दशकों से रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है। यह मुलाकात व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की दूसरी मंत्री स्तरीय बैठक के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जो पिछले साल मई में ब्रसेल्स में हुई थी। इस बैठक में दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी और इस बार की मुलाकात के दौरान कई नए पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन ने दिल्ली पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, “यह संघर्षों और प्रतिस्पर्धा का दौर है, और ऐसे समय में भरोसेमंद मित्रों की जरूरत होती है। यूरोप के लिए, भारत सिर्फ एक मित्र नहीं बल्कि एक रणनीतिक सहयोगी है।” वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने की दिशा में चर्चा करने का इरादा रखती हैं।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की प्रतिक्रिया

इस बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उर्सुला वोन डेर लेयेन से मुलाकात के बाद कहा, “आज दिल्ली में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन से मुलाकात करके खुशी हुई। यूरोप के साथ भारत की भागीदारी को पुनर्जीवित करने पर उनकी सोच सराहनीय है। इस दौरे के दौरान भारतीय मंत्रियों और यूरोपीय संघ के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की व्यापक भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि हम भारत-EU संबंधों को और गहरा बनाने को लेकर कितने गंभीर हैं।”

यह बैठक भारत और यूरोपीय संघ के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक मुद्दों और सैन्य रणनीतियों को लेकर दोनों पक्षों के दृष्टिकोण में अंतर सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी और उर्सुला वोन डेर लेयेन की यह मुलाकात दोनों देशों के बीच मजबूत और विविध सहयोग की नई दिशा स्थापित कर सकती है।

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