नूर खान एयरबेस पर भारत के हमले से घबराया पाकिस्तान, परमाणु जखीरे पर मंडराया खतरा बना सीजफायर की वजह
भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद दोनों देशों में हालात सामान्य हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी शांति बनी हुई है। हालांकि सीजफायर के पीछे की असली वजह अब सामने आ रही है। अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय खुद को दिया, लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान भारत के सटीक हमलों से इतना घबरा गया कि उसे बातचीत की मेज पर आना पड़ा।
असल में, भारतीय सेना के जवाबी हमलों के दौरान पाकिस्तान के परमाणु जखीरे को खतरा पैदा हो गया था। सेना ने इस्लामाबाद के पास रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस के करीब हमला किया, जो पाकिस्तान का परमाणु कमांड सेंटर भी माना जाता है। यहां एयरफोर्स का एयर मोबिलिटी कमांड और नेशनल कमांड अथॉरिटी स्थित हैं, जहां से लड़ाकू विमान और ड्रोन हमलों का नियंत्रण किया जाता है। भारतीय हमलों में इस एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि इसमें ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल हुआ, जिसने पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को नाकाम करते हुए सटीक निशाना साधा।
इस हमले के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया। सेनाध्यक्ष जनरल मुनीर और शीर्ष सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व में खलबली मच गई। उन्हें अहसास हुआ कि भारत अब उनके परमाणु हथियारों को भी निष्क्रिय करने में सक्षम है। यही वजह रही कि पाकिस्तान ने तुरंत सीजफायर की पेशकश की और डीजीएमओ स्तर पर भारत से संपर्क साधा।
हालांकि, सीजफायर के बावजूद पाकिस्तान पर भारत का कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बना हुआ है। सिंधु जल संधि को निलंबित करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को घेरने की रणनीति पर काम जारी है। पाकिस्तान को अब समझ आ गया है कि भारत सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि परमाणु शक्ति को भी निष्प्रभावी करने की क्षमता रखता है।
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