हनीमून पर हत्या, सोशल मीडिया पर पोस्ट और अब साज़िश की परतें – सोनम को नहीं है पति की हत्या का अफसोस!
मेघालय की खूबसूरत वादियों में जहां कपल्स अपने रिश्तों को यादगार बनाते हैं, वहीं एक हनीमून ऐसा भी था, जो हत्या, धोखे और साजिशों की खौफनाक दास्तां में बदल गया। इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी की हत्या की गुत्थी जब खुलने लगी, तो पुलिस को कहानी से ज़्यादा एक स्क्रिप्ट नजर आई – और उस स्क्रिप्ट की मास्टरमाइंड कोई और नहीं, खुद उसकी पत्नी सोनम निकली।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सोनम को अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का कोई अफसोस नहीं है। मेघालय पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से ही सोनम लगातार पूछताछ में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही। लेकिन अब जांच जैसे-जैसे गहराई में गई, वैसे-वैसे साजिश की परतें खुलने लगीं।
सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि हत्या के बाद सोनम ने खुद राजा के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट किया, ताकि किसी को शक न हो कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। ये चाल इसलिए चली गई थी ताकि सोनम को वक्त मिले – सबूत मिटाने का, फोन गायब करने का और अपने ट्रैक रिकॉर्ड साफ करने का।
SIT की पूछताछ में सोनम ने आख़िरकार हत्या की साजिश में शामिल होने की बात कबूल ली। पुलिस ने जब सबूत सामने रखे, तब सोनम ने स्वीकार किया कि वह खुद इस हत्या की योजना में शामिल थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
मेघालय पुलिस अब लव ट्रायंगल से आगे जाकर पैसों की लेन-देन, साजिशकर्ता और हत्यारों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि सोनम और राज कुशवाहा के बीच की बातचीत, कॉल डिटेल्स और पैसों के ट्रांजैक्शन अब जांच के दायरे में हैं। पुलिस को शक है कि कातिलों को हायर किया गया था और इसके बदले में एक तय रकम दी गई थी। अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह रकम किसने दी, कब दी और कितनी दी।
सोनम का मोबाइल अभी तक नहीं मिल पाया है। घटना के वक्त उसके पास दो मोबाइल फोन थे, दोनों गायब हैं। बाकी चार आरोपियों के फोन बरामद हो चुके हैं, और कुछ सिम कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। शक है कि इन सिम का इस्तेमाल हत्या के पहले और बाद में किया गया था।
पुलिस अब सोनम और राज कुशवाहा को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है। यदि दोनों के बयानों में विरोधाभास मिलता है, तो यह साजिश और गहरी हो सकती है। साथ ही राजा के परिवार के भी बयान दर्ज किए जाएंगे, ताकि हत्या के पीछे के सभी पक्षों को समझा जा सके।
इस पूरे केस ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों की सतह के नीचे क्या कुछ छिपा हो सकता है – और हनीमून के नाम पर किस कदर मौत की पटकथा लिखी जा सकती है। मेघालय पुलिस की जांच अब उस मोड़ पर है, जहां से सच्चाई के आखिरी पन्ने खुलने बाकी हैं – और शायद वो पन्ने और भी खौफनाक हों।
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