सोच बदलने वाली फिल्म ‘हिज स्टोरी ऑफ इतिहास’ ने मचाया तहलका, IMDb पर मिली 9.7 की रिकॉर्डतोड़ रेटिंग
ओटीटी के दौर में जहां हर हफ्ते कोई न कोई नई फिल्म रिलीज होती है, वहीं कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं देतीं, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करती हैं। ऐसी ही एक फिल्म हाल ही में चर्चा का केंद्र बनी हुई है — ‘हिज स्टोरी ऑफ इतिहास’, जिसे IMDb पर 9.7 की अविश्वसनीय रेटिंग मिली है। यह रेटिंग न केवल किसी नई हिंदी फिल्म के लिए एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह दर्शकों की गहरी प्रतिक्रिया और जुड़ाव को भी दर्शाती है।
फिल्म की कहानी बेहद प्रभावशाली और मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली है। यह एक ऐसे शिक्षक नामित भारद्वाज की कहानी है जो चंडीगढ़ के एक स्कूल में इतिहास पढ़ाते हैं। लेकिन जब वे अपनी बेटी की इतिहास की किताब पढ़ते हैं, तो उसमें मौजूद तथ्यों पर उन्हें गहरा संदेह होता है। वह महसूस करते हैं कि इतिहास की किताबें आधी-अधूरी या जानबूझकर तोड़े-मरोड़े गए तथ्यों से भरी हैं। इसके बाद वह RTI जैसे कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं और एक बड़ी वैचारिक लड़ाई की शुरुआत करते हैं—शिक्षा प्रणाली, पाठ्यक्रम निर्माण और सत्ता के ढांचों के खिलाफ।
इस कहानी को लेखक नीरज अत्री की चर्चित किताब ‘ब्रेनवॉश्ड रिपब्लिक’ से रूपांतरित किया गया है, जिसमें भारतीय शिक्षा व्यवस्था और इतिहास लेखन में पक्षपात और बदलाव को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। फिल्म को सिनेमाई रूप में बेहद संजीदगी और असरदार तरीके से पेश किया गया है। सुबोध भावे ने नामित भारद्वाज की भूमिका निभाई है, जो हर फ्रेम में दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांध लेते हैं। उनके साथ योगेंद्र टिक्कू और अंकुल विकल जैसे मंजे हुए कलाकारों की मौजूदगी फिल्म की गहराई को और बढ़ा देती है।
मई 2025 में थियेटर में रिलीज होने के बाद अब यह फिल्म जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम के लिए उपलब्ध है। जल्द ही यह तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज की जाएगी, ताकि देशभर के ज्यादा से ज्यादा लोग इस ज़रूरी विमर्श से जुड़ सकें।
‘हिज स्टोरी ऑफ इतिहास’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक आंदोलन है — जो हर उस व्यक्ति के भीतर सवाल उठाता है जिसने कभी इतिहास पर भरोसा किया हो। यह फिल्म साबित करती है कि सच्ची कहानियों में ही सबसे गहरी क्रांति छुपी होती है।
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