December 7, 2025

ध्यान योग कार्यक्रम में राष्ट्रपति बोलीं – तकनीकी के साथ समाज में बढ़ी ईर्ष्या और दुख, मेडिटेशन है कारगर उपाय

लखनऊ के गुलजार उपवन में शुक्रवार को ब्रह्मकुमारीज संस्थान की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय ध्यान योग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग पहुंचे, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी और बिना पास के किसी को प्रवेश नहीं दिया गया।

कार्यक्रम का स्वागत रंग-बिरंगे आयोजनों के साथ किया गया। बच्चों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत किया और दीदियों को कलश, भाइयों को ध्वजा देकर सम्मानित किया गया। रंगोली कलाकार हितेश ने राष्ट्रपति के स्वागत में खूबसूरत रंगोली बनाई। ब्रह्मकुमारीज संस्थान के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने बताया कि राष्ट्रपति के लिए एक विशेष कक्ष बनाया गया है, जिसमें वह कुछ देर ध्यान करेंगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ध्यान योग को लेकर यह अभियान हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होंने ब्रह्मकुमारीज संस्थान और उनके कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि राजयोग के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का प्रचार समाज में अहम भूमिका निभा रहा है। उनका मानना है कि ध्यान योग से समाज में मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत होते हैं।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को सद्गुण की ओर अग्रसर करता है और मानसिक शांति, पवित्रता तथा आत्मिक संतुलन प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि मेडिटेशन हमें स्वयं से जोड़ता है, हमें शांति सिखाता है और मृत्यु के डर को भी पीछे छोड़ देता है। राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्मकुमारीज संस्था विश्व शांति और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओम शांति कहकर संबोधन शुरू किया और ध्यान योग अभियान के लिए संस्था का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीकी में प्रगति के बावजूद समाज में एकाकीपन, ईर्ष्या, अविश्वास और दुख बढ़े हैं। ऐसे में मेडिटेशन एक कारगर उपाय है, जो मनुष्य को भीतर की ओर देखने, आत्मिक चेतना जागृत करने और प्रेम, विश्वास एवं भाईचारे को विकसित करने में मदद करता है।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि केवल बाहरी प्रगति पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने भीतर झांकने और आत्मविश्लेषण की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने ब्रह्मकुमारीज संस्था की ओर से नारी सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, ध्यान और योग के माध्यम से समाज में शांति, सुख और प्रेम का संदेश व्यापक रूप से फैलाया जा सकता है।

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