उच्चतम न्यायालय ने देशभर के हाइवे और एक्सप्रेस-वे पर आवारा पशुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। साथ ही, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया गया है कि वे इन्हें तुरंत हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर इस आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर में आवारा पशुओं और कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सख्त रुख अपनाया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने साफ कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और एक्सप्रेस-वे पर अब किसी भी तरह के आवारा पशु की एंट्री नहीं होगी। अदालत ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे तुरंत कार्रवाई करें और ऐसे सभी जानवरों को हाइवे से हटाएं।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह बेहद गंभीर मुद्दा है। आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में इंसानी जानें आवारा पशुओं की वजह से जा रही हैं। जस्टिस नाथ ने कहा, “राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर किसी भी तरह का मवेशी, गाय, सांड या अन्य पशु न घूमे। इसके लिए एक संयुक्त समन्वित अभियान चलाया जाए और हटाए गए पशुओं की उचित देखभाल की जाए।”
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इस आदेश के पालन के लिए जिम्मेदार होंगे। अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माने जाएंगे। अदालत ने राज्यों से आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश राजस्थान हाई कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों की पुष्टि के रूप में भी माना जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संस्थागत परिसरों में भी आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जिला अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, सार्वजनिक खेल परिसरों और अन्य सरकारी संस्थानों में कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए पर्याप्त बाड़ और सुरक्षा व्यवस्था की जाए। यह कार्य दो सप्ताह में शुरू किया जाए और अधिकतम आठ सप्ताह के भीतर पूरा हो।
अदालत ने कहा कि स्थानीय निकाय और नगरपालिका प्राधिकरण नियमित रूप से इन परिसरों का निरीक्षण करें ताकि किसी भी आवारा कुत्ते का स्थायी निवास वहां न बन सके। ऐसे सभी कुत्तों को सुरक्षित रूप से पकड़कर नसबंदी की जाए और उन्हें निर्धारित आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी स्थिति में उन कुत्तों को उसी क्षेत्र में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था, क्योंकि इससे पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देशभर में सड़क सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु नियंत्रण के दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अदालत ने राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी को ठोस एवं त्वरित कार्रवाई करनी होगी।
Share this content:
