हेल्थ टिप्स: ज़्यादा पसीना आने और डिओडोरेंट इस्तेमाल को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
पसीना आना शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसकी बदबू और बार-बार गीलापन लोगों को असहज कर देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पसीना रोकना नहीं, बल्कि इसे मैनेज करना ज़रूरी है। आइए जानते हैं पसीने, डिओडोरेंट और स्किन केयर से जुड़े ज़रूरी तथ्य।
गर्मी, कसरत या तनाव के दौरान पसीना आना सामान्य है। यह शरीर का तापमान नियंत्रित करने और ठंडा रखने में मदद करता है। हालांकि, बदबू सीधे पसीने से नहीं आती, बल्कि तब होती है जब बैक्टीरिया फैट वाले पसीने को तोड़ते हैं। यह पसीना खासतौर पर बगल और जांघों के पास निकलता है। इसी वजह से इन हिस्सों से बदबू ज़्यादा आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सफाई पसीने और बदबू से निपटने का सबसे आसान उपाय है। रोज़ाना नहाना, बगल, पैरों और जांघों के ऊपरी हिस्से को अच्छे से धोना ज़रूरी है। कपड़ों का चुनाव भी मायने रखता है—कॉटन और लिनन जैसे कपड़े पसीना सोखकर राहत देते हैं, जबकि सिंथेटिक कपड़े गर्मी और बदबू बढ़ा सकते हैं।
डिओडोरेंट और एंटीपर्सपिरेंट पसीने और बदबू को मैनेज करने में मदद करते हैं। डिओडोरेंट में मौजूद अल्कोहल बैक्टीरिया को कम करता है और खुशबू बदबू को ढक लेती है। वहीं, एंटीपर्सपिरेंट में मौजूद एल्युमिनियम साल्ट्स स्वेट ग्लैंड्स को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर पसीना कम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हें रात को लगाना सबसे असरदार होता है, क्योंकि उस समय स्वेट ग्लैंड्स कम सक्रिय रहते हैं।
हालांकि, सावधानी बरतना भी ज़रूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि डिओडोरेंट को शरीर के हर हिस्से पर नहीं लगाना चाहिए, खासकर निजी अंगों पर। वहां की त्वचा संवेदनशील होती है और डिओडोरेंट से जलन, एलर्जी या प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। हल्के साबुन या पानी से धोना ही पर्याप्त है।
कई लोग नैचुरल डिओडोरेंट्स की ओर भी रुख कर रहे हैं। इनमें पौधों से बने तेल या नैचुरल तत्व होते हैं जो बदबू को कम करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि “नैचुरल” का मतलब हमेशा सुरक्षित नहीं होता—कई बार बेकिंग सोडा या एसेंशियल ऑयल्स संवेदनशील त्वचा पर रैश ला सकते हैं।
कुछ लोगों को हाइपरहाइड्रोसिस नाम की स्थिति होती है, जिसमें सामान्य से कहीं ज़्यादा पसीना आता है। यह थायरॉयड, हार्मोनल बदलाव या किसी और स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में स्ट्रॉन्ग एंटीपर्सपिरेंट्स, बोटॉक्स इंजेक्शन या गंभीर स्थिति में सर्जरी तक की सलाह दी जाती है।
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