क्या कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स कम कर सकती है होम्योपैथी?
एक्सपर्ट से जानें पूरा सच
कैंसर एक गंभीर और जटिल बीमारी है। इसका इलाज कई चरणों और तरीकों से होता है। इनमे सबसे आम और प्रभावी तरीका है कीमोथेरेपी। यह इलाज कैंसर सेल्स को नष्ट करने के लिए दिया जाता है। हालांकि, कीमोथेरेपी जितनी कारगर है, उतने ही इसके साइड इफेक्ट्स भी मरीज को परेशान करते हैं।
मरीज अक्सर थकान, बाल झड़ना, मतली, उल्टी, भूख कम लगना, त्वचा पर रैशेज़ और मुंह के छाले जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। कई बार यह साइड इफेक्ट्स मरीज को शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी कमजोर बना देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई सपोर्टिव थेरेपी इन परेशानियों को कम कर सकती है?
होम्योपैथी का रोल
होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. मंजू सिंह के मुताबिक,
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होम्योपैथी कैंसर का इलाज नहीं है और यह कीमोथेरेपी या रेडिएशन का विकल्प भी नहीं हो सकती।
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लेकिन, यह मरीज को सपोर्टिव केयर देती है यानी कीमोथेरेपी के दौरान आने वाले साइड इफेक्ट्स को कम करने में मदद कर सकती है।
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कई मरीजों ने अनुभव साझा किया है कि होम्योपैथिक दवाओं से थकान, मतली, मुंह के छाले, त्वचा पर जलन, बेचैनी जैसी समस्याओं में राहत मिली है।
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इससे मरीज की एनर्जी लेवल, नींद और मानसिक संतुलन बेहतर होता है।
शोध और अनुभव क्या कहते हैं?
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दुनियाभर में लगभग 30-40% कैंसर मरीज अपने मुख्य इलाज के साथ होम्योपैथी, योग, आयुर्वेद जैसी सपोर्टिव थेरेपी लेते हैं।
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WHO भी पारंपरिक और वैकल्पिक इलाजों को मेडिकल सिस्टम में जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
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भारत में AYUSH (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) काफी लोकप्रिय हो चुका है और कैंसर मरीज भी इसे अपनाते हैं।
किन बातों का रखें ध्यान
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होम्योपैथिक दवाएं सिर्फ लक्षण कम करने और आराम देने के लिए होती हैं।
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इन्हें हमेशा लाइसेंस्ड और ट्रेनड डॉक्टर से ही लेना चाहिए।
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यह कीमोथेरेपी, सर्जरी या रेडिएशन जैसे मुख्य इलाज के साथ ही उपयोग की जानी चाहिए।
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इनसे मरीज का जीवन थोड़ा आसान और मानसिक रूप से संतुलित हो सकता है।
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