हाथरस सत्संग हादसा: लापरवाही की परतें उखड़ीं, 121 की मौत, प्रशासन पर गंभीर सवाल
हाथरस के सिकंदराराऊ में 2024 में हुए भयावह सत्संग हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। ढाई से तीन लाख की भारी भीड़ और बेतहाशा लापरवाही ने इस हादसे को अंजाम दिया। अब जांच आयोग की रिपोर्ट ने प्रशासन की ढिलाई और लापरवाही को उजागर किया है, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, न तो सत्संग आयोजन की अनुमति देने से पहले कोई गहन निरीक्षण किया गया, न ही उपद्रव की संभावना की गंभीरता से जांच की गई।
लापरवाही की परतें उखड़ीं:
मृतकों की संख्या 121 तक पहुंच गई, और पुलिस ने 11 आरोपियों के खिलाफ 3200 पेज की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 676 गवाहों को शामिल किया गया। लेकिन इसके बावजूद जांच आयोग ने आयोजन में हुई लापरवाही को गंभीरता से लिया है। वह कहते हैं कि इस हादसे में केवल व्यवस्था की खामियां ही नहीं थीं, बल्कि साजिश की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता है।
घटनास्थल पर की गईं लापरवाहियां
सत्संग के आयोजक ने 80 हजार लोगों के जुटने का अनुमान लगाया था, लेकिन एलआईयू की रिपोर्ट में 2 लाख की भीड़ का अनुमान था। इसके बावजूद केवल 69 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इनमें से 55 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और एक प्लाटून पीएसी की मांग की गई थी, जो पूरी नहीं की गई। भीड़ के अंदर कोई उचित व्यवस्था नहीं थी, और पुलिस बल सिर्फ पंडाल के बाहर था। पंडाल के अंदर भीड़ नियंत्रण का जिम्मा सेवादारों के कंधों पर छोड़ दिया गया था।
रिपोर्ट की विरोधाभासी बातें और प्रशासन की खामियां
आयोग की रिपोर्ट में भीड़ की संख्या को लेकर विरोधाभासी आकलन सामने आया है। पुलिस की ओर से भीड़ का सही आकलन नहीं किया गया था, जो कि इस घटना का प्रमुख कारण बन गया। जांच में यह भी पाया गया कि कार्यक्रम स्थल पर वायरलेस उपकरण की व्यवस्था नहीं थी और सिर्फ मोबाइल के जरिए संपर्क किया जा रहा था, जिसका नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। इसके अतिरिक्त, पुलिस बल की संख्या श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मुकाबले नाकाफी थी।
हद से ज्यादा लापरवाही
सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, आयोजन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की भी घोर कमी थी। पानी और छांव की कोई व्यवस्था नहीं थी, और दो टैंकर हाईवे पर खड़े थे, जिससे फिसलन हो गई। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठते हैं क्योंकि मेडिकल कंट्रोल रूम भी नहीं था और एंबुलेंस की सुविधा न के बराबर थी। इसके अलावा, गाड़ियों की पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था की भी कोई ठोस योजना नहीं थी।
पुलिस और प्रशासन की अनदेखी
कार्यक्रम में मेडिकल और पार्किंग जैसी व्यवस्थाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया था। पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर भेजने से पहले ब्रिफिंग नहीं की गई, और उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि विपरीत परिस्थितियों में क्या करना है। इसके अलावा, आयोजन स्थल पर महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कोई जिम्मेदार व्यक्ति तैनात नहीं था, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई
हादसे के बाद पुलिस ने 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, और मामले की सुनवाई न्यायालय में चल रही है। इसमें शामिल मुख्य आरोपियों के नामों में देव प्रकाश मधुकर, मेघ सिंह, मुकेश कुमार और अन्य कई लोग हैं। इनमें से आठ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि तीन की जमानत याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
राजनीतिक घमासान
हाथरस की यह घटना सियासी विवादों का कारण बनी, और विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई मंत्री घटना के बाद घटनास्थल पर पहुंचे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पीड़ितों से मुलाकात की और विपक्ष ने सरकारी लापरवाही को लेकर सवाल उठाए।
निष्कर्ष: प्रशासन की खामियों का जिम्मेदार कौन?
इस हादसे ने प्रशासन की नाकामी को उजागर कर दिया है। वर्तमान जांच आयोग ने यह साफ किया कि हादसे में कई प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियां थीं। इनसे न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी लापरवाही दिखी। आने वाले समय में सत्संग और अन्य सार्वजनिक आयोजनों की व्यवस्था को लेकर और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है।
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