हनुमान चालीसा पाठ को लेकर शास्त्रीय नियम, इन परिस्थितियों में करना माना गया है वर्जित
हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का विशेष महत्व माना जाता है। बजरंगबली के भक्त नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं और मान्यता है कि इससे भय, रोग, नकारात्मक शक्तियों और शनि दोष जैसी बाधाएं दूर होती हैं। खासतौर पर मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए शुभ माना गया है। लेकिन शास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हनुमान चालीसा का पाठ हमेशा नियम और शुद्धता के साथ ही करना चाहिए, अन्यथा इसका फल नहीं मिलता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसी परिस्थितियां भी हैं, जिनमें हनुमान चालीसा का पाठ वर्जित माना गया है। शास्त्र बताते हैं कि दोपहर के समय हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस समय हनुमान जी के लंका में होने की मान्यता है। इसके अलावा घर में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर शुद्धि संस्कार पूर्ण होने तक न तो हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और न ही पूजा से जुड़ी वस्तुओं को स्पर्श करना चाहिए।
इसी तरह शिशु के जन्म के बाद लगने वाले सूतक काल में भी हनुमान चालीसा का पाठ निषेध माना गया है। महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना वर्जित बताया गया है, हालांकि इस समय मानसिक जप की अनुमति दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से इसे शारीरिक शुद्धता से जोड़ा गया है।
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि तामसिक भोजन, जैसे मांस या मदिरा का सेवन करने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। हनुमान जी को ब्रह्मचारी माना जाता है, इसलिए पूजा के समय सात्विक आहार, शुद्ध वस्त्र और संयम का पालन जरूरी बताया गया है। गंदे या अपवित्र वस्त्र पहनकर भी पाठ करना उचित नहीं माना जाता।
हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए विधि का पालन भी जरूरी है। ऊन या कुशा के आसन पर बैठकर, दीपक जलाकर और पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करना शुभ माना जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन 7, 11 या 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी बताया गया है।
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