हनुमान जयंती पर घर से भागेंगे संकट! सिंदूरी रंग से बनी ये दिव्य रंगोली बना देगी आपके द्वार को सुरक्षा कवच

आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ हनुमान जयंती मनाई जा रही है। मंदिरों से लेकर घरों तक गूंज रहे हैं “जय हनुमान” के जयघोष, हो रहा है सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और भजन-कीर्तन का आयोजन। हर कोई इस खास दिन पर पवनपुत्र बजरंगबली को प्रसन्न करने की कोशिश में जुटा है।

कहा जाता है,
“नासे रोग हरे सब पीड़ा,
जपत निरंतर हनुमत बीड़ा।”
और
“भूत पिशाच निकट नहीं आवे,
महावीर जब नाम सुनावे।”

ऐसे में आज का दिन सिर्फ पूजा और उपासना का नहीं, बल्कि अपने घर-आंगन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने का भी है। और इसका सबसे सुंदर और प्रभावी तरीका है – हनुमान जी की थीम पर रंगोली बनाना।

संकटमोचन की कृपा पाने के लिए बनाएं सिंदूरी रंगोली

हनुमान जी को सिंदूरी रंग प्रिय है। मान्यता है कि इस रंग में उनकी कृपा का विशेष वास होता है। ऐसे में अगर आज के दिन घर के द्वार पर सिंदूरी रंग से बनी रंगोली बनाई जाए, तो रोग, भय, और बुरी शक्तियों का प्रवेश निषिद्ध हो जाता है।

रंगोली के लिए सबसे आसान और प्रभावशाली तरीका है –

सिंदूरी या भगवा रंग को छलनी से भूमि पर फैलाएं।

इस पर गदा की आकृति बनाएं, जो बल का प्रतीक है।

गदा के किनारे हनुमान जी का अर्धमुख बनाएं।

एक ओर “जय हनुमान” या “जय श्रीराम” जैसे मंत्र लिखें।

साधारण से हटकर बनाएं धनुषाकार रंगोली

अगर कुछ अलग और आकर्षक बनाना चाहते हैं, तो रंगोली को गोल या चौकोर आकार की बजाय धनुष की आकृति में तैयार करें।

धनुष की रेखाएं खींचें।

अंदर अर्धमुखीय हनुमान छवि बनाएं।

चेहरे की भाव-भंगिमा में साहस और करुणा झलके।

यह न सिर्फ अद्भुत लगेगा, बल्कि घर के द्वार पर एक शक्तिशाली रक्षक छवि का काम भी करेगा।

छवि आधारित रंगोली से जगाएं आस्था

हनुमान जी की संपूर्ण छवि को दर्शाती रंगोली बेहद प्रभावशाली होती है। इसमें आप

बजरंगबली का संपूर्ण रूप बनाएं

चारों ओर आम, अशोक या बरगद के पत्ते सजाएं

उनके कंधे पर गदा और चेहरे पर मुस्कान के भाव दें

ऐसी रंगोली न केवल मन को आनंदित करती है बल्कि घर में शांति, सुरक्षा और सुख-समृद्धि भी लाती है।

तो आज हनुमान जयंती के इस शुभ अवसर पर, जब हर कोना ‘जय बजरंगबली’ की गूंज से भर रहा है, तो क्यों न अपने घर के द्वार पर भी उनकी दिव्य छवि उकेरें, जो सिर्फ रंग नहीं बल्कि संकटों से सुरक्षा की लकीर खींचे।

क्योंकि जहां हनुमान का वास होता है, वहां संकट नहीं टिकता।

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