ट्रंप का बड़ा फैसला: H1B वीजा पर अब 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस
आजकल एच-1बी वीजा चर्चा का विषय बना हुआ है। तो आइए जानते हैं कि आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले का भारत और भारतीय पेशेवरों पर क्या असर पड़ने वाला है। ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में बदलाव करते हुए कंपनियों पर 1,00,000 डॉलर यानी करीब 86 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस लगाने का आदेश दिया है। यह शुल्क पहले की तुलना में 35 गुना ज्यादा है और 21 सितंबर से लागू हो जाएगा।
इस फैसले से सबसे बड़ा असर उन भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर पड़ने वाला है, जो अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी तलाशते हैं। अब अवसर सीमित हो जाएंगे क्योंकि वरीयता अमेरिकी नागरिकों को दी जाएगी। इससे भारतीय युवाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और करियर की शुरुआत करना और मुश्किल हो जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, भारतीयों में से अधिकांश आईटी और STEM सेक्टर में कार्यरत हैं। इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियों के हजारों कर्मचारी एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं। अब उन्हें भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा। खासकर मिड-लेवल और एंट्री-लेवल कर्मचारियों के लिए वीजा हासिल करना और भी कठिन हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल भारतीयों के लिए ही नुकसानदायक नहीं है, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर होगा। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां जैसे गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा भारतीय पेशेवरों पर निर्भर हैं। अतिरिक्त फीस से उनकी लागत कई अरब डॉलर बढ़ जाएगी, जिससे कंपनियां नौकरियां अन्य देशों को आउटसोर्स करने पर मजबूर हो सकती हैं।
भारत में इस फैसले को लेकर हड़कंप मच गया है। राजनीतिक दलों ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं, जबकि आईटी कंपनियों के संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे 200 अरब डॉलर से ज्यादा के सॉफ्टवेयर निर्यात पर नकारात्मक असर हो सकता है। कई विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अब प्रतिभाशाली भारतीय वापस लौट सकते हैं, जिसका लंबी अवधि में भारत को फायदा होगा।
ट्रंप का यह फैसला भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि भारत सरकार की तरफ से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि इस पर जल्द ही अमेरिका से उच्च स्तर की बातचीत होगी।
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