गाजियाबाद का फर्जी एंबेसडर डॉ. केएस राणा: खुद को बताता था ओमान का हाई कमिश्नर, चिट्ठी में की बड़ी गलती और पकड़ा गया
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से फर्जी एंबेसडर बनने का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हाल ही में हर्षवर्धन जैन नामक युवक को चार देशों का नकली दूतावास बनाकर लोगों को ठगने के आरोप में STF ने पकड़ा था, और अब इसी तरह की कहानी उजागर हुई है डॉ. प्रोफेसर केएस राणा की। चार महीने पहले वह खुद को ‘ओमान का हाई कमिश्नर’ बताकर ठगी और जालसाजी करता पकड़ा गया था।
डॉ. केएस राणा खुद को दो यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर और एनजीओ से जुड़ा सामाजिक कार्यकर्ता बताता था। उसे लाल-नीली बत्ती वाली मर्सिडीज में चलने और पुलिस सुरक्षा के साथ घूमने का बड़ा शौक था। इसी दिखावे के चक्कर में वह खुद गाजियाबाद पुलिस की नजर में आ गया। मार्च 2025 में राणा ने जिला प्रशासन को चिट्ठी लिखकर खुद को ओमान का हाई कमिश्नर बताया और सुरक्षा की मांग की।
लेकिन इसी चिट्ठी में उसने एक बड़ी गलती कर दी। ओमान पर कभी ब्रिटिश हुकूमत नहीं रही, इसलिए वहां के प्रतिनिधि को ‘हाई कमिश्नर’ नहीं बल्कि ‘एंबेसेडर’ कहा जाता है। इस बुनियादी राजनयिक गलती पर गाजियाबाद एसएसपी अजय कुमार मिश्रा की नजर पड़ गई और उन्होंने पत्र की सत्यता की जांच कराई। ओमान एंबेसी ने पुष्टि की कि कोई केएस राणा वहां कार्यरत नहीं है।
जांच में पता चला कि राणा की कार भी फर्जी डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट वाली थी, जो किसी और की थी। उसने गाजियाबाद पुलिस के डायरेक्टर को सीधे पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की, जबकि विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी चिट्ठियां मंत्रालय द्वारा जिला प्रशासन को भेजी जाती हैं। इस ‘ओवर स्मार्टनेस’ के चलते पुलिस को और भी संदेह हुआ और राणा को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक लग्जरी मर्सिडीज SUV बरामद हुई, जिस पर फर्जी लाल-नीली बत्ती और डिप्लोमेटिक प्लेट लगी थी। फिलहाल डॉ. राणा जेल में बंद है और पुलिस उससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। मामला यह दर्शाता है कि कैसे कुछ लोग फर्जीवाड़े के दम पर खुद को वीआईपी दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अंत में कानून के शिकंजे से बच नहीं पाते।
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