May 1, 2026

 किन कंपनियों के शेयर F&O सेगमेंट में हैं, क्या होता है F&O और क्यों है इसमें भारी जोखिम

निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह जानना जरूरी है कि शेयर बाजार का F&O (Futures & Options) सेगमेंट क्या होता है और इसमें किन कंपनियों के शेयर शामिल हैं। हाल ही में नीचे दी गई कंपनियों के शेयर एफएंडओ सेगमेंट में शामिल किए गए हैं, जिनके लॉट साइज निम्नलिखित हैं:

फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड (FORTIS) – लॉट साइज: 775

केयंस टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड (KAYNES) – लॉट साइज: 100

मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड (MANKIND) – लॉट साइज: 225

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MAZDOCK) – लॉट साइज: 175

पीरामल फार्मा लिमिटेड (PPLPHARMA) – लॉट साइज: 2500

रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) – लॉट साइज: 1375

यूएनओ मिंडा लिमिटेड (UNOMINDA) – लॉट साइज: 550

क्या होता है F&O सेगमेंट?

F&O, यानी Futures और Options, शेयर बाजार के डेरिवेटिव सेगमेंट का हिस्सा हैं। ये ऐसे वित्तीय अनुबंध (Contracts) होते हैं जो भविष्य की तारीख में किसी निर्धारित मूल्य पर किसी संपत्ति (जैसे शेयर, इंडेक्स या कमोडिटी) को खरीदने या बेचने की अनुमति देते हैं। ये मूल रूप से हेजिंग के लिए बनाए गए थे ताकि निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से खुद को सुरक्षित रख सकें। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनका इस्तेमाल स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग यानी मुनाफे की संभावना पर शर्त लगाने के लिए तेजी से बढ़ा है।

क्यों है इसमें भारी जोखिम?

F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग करना अत्यधिक जोखिम भरा माना जाता है। सेबी (SEBI) की रिपोर्ट के अनुसार, F&O में ट्रेडिंग करने वाले हर 10 में से 9 ट्रेडर्स को घाटा होता है। FY22 से FY24 के बीच सेबी की एक स्टडी से पता चला कि F&O सेगमेंट में शामिल अधिकांश ट्रेडर्स ने औसतन ₹2 लाख का नुकसान झेला और कुल मिलाकर इस दौरान निवेशकों को ₹1.8 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ।

इसलिए, जिन निवेशकों को इस सेगमेंट की गहरी समझ नहीं है या जिनके पास उच्च जोखिम सहने की क्षमता नहीं है, उन्हें F&O ट्रेडिंग से बचने की सलाह दी जाती है। F&O में लाभ की संभावना जरूर है, लेकिन इसकी कीमत भी भारी हो सकती है।

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