May 5, 2026

सावन में भी जाल बिछाकर मछलियों का अवैध शिकार जारी, जालौन के कालपी राजघाट में मत्स्य आखेट का बढ़ता कारोबार

सावन के पवित्र महीने में मत्स्य आखेट यानी मछली शिकार पर पूरे जिले में प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन जालौन के कालपी राजघाट क्षेत्र में यह प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायतों और प्रशासन की चेतावनियों के बावजूद नदियों में जाल डालकर अवैध मछलियों का शिकार बड़े पैमाने पर जारी है। मछलियों को बड़ी मात्रा में पकड़कर बोरी में भरकर वाहनों के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा है, जिससे यह अवैध व्यापार क्षेत्र में फल-फूल रहा है।

 

मत्स्य विभाग और प्रशासन ने इस अवैध गतिविधि पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन विभागीय अफसरों की उपस्थिति और कड़ी कार्रवाई के बावजूद मछली शिकारी अपने हौसले नहीं छोड़ रहे हैं। वे खुलेआम नदियों में जाल डालकर मछलियों का शिकार कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि विभागीय खौफ खत्म हो चुका है या विभागीय कार्रवाई में कमजोरी है। इससे मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इस अवैध कारोबार को रोकने में क्यों नाकामी हो रही है।

 

स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों का आरोप है कि इस अवैध मत्स्य आखेट के पीछे आकाओं का संरक्षण है। उन्हें उच्चस्तरीय संरक्षण मिलने के कारण अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के यह अवैध काम कर रहे हैं। इसके कारण तटवर्ती इलाकों में धार्मिक और सामाजिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं, जिससे क्षेत्र में आक्रोश फैल रहा है। स्थानीय जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इस अवैध मत्स्य शिकार पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हो सके और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान बना रहे।

 

मौजूदा जानकारी के अनुसार इस अवैध मछली शिकार के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो लगभग दो वर्षों से इस क्षेत्र में पैर जमा चुका है। शिकार करने वालों ने खुद ही ठेकेदार का नाम उजागर कर दिया है, जिसका पर्दाफाश जल्द ही किया जाएगा। यह गिरोह बड़े पैमाने पर मछलियों को पकड़ कर बाजार में सप्लाई करता है, जिससे स्थानीय मत्स्य व्यापार प्रभावित हो रहा है। प्रशासन और मत्स्य विभाग की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हैं कि वे कब तक इस गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई करते हैं।

 

इस पूरे मामले से न केवल क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्थिरता भी प्रभावित हो रही है। आगामी दिनों में इस अवैध मत्स्य आखेट के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई और संगठित गिरोह के खिलाफ छापेमारी पर विशेष रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिसमें इस कारोबार में संलिप्त लोगों के नाम और संरक्षण देने वालों का भी खुलासा किया जाएगा।

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